सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए एसटीएफ से लेकर पुलिसकर्मियों तक की ड्यूटी है लेकिन खुद एक पुलिसकर्मी का बेटा ही सॉल्वर गिरोह का मास्टरमाइंड निकला है। उसने जल्द ही लाखों रुपये कमाने के लालच में अपने तीन साथियों की मदद से मंडल में सॉल्वर्स का जाल बिछा दिया। ये खुलासा सॉल्वर गिरोह के दो सदस्यों के पकडे़ जाने के बाद पुलिस पूछताछ में हुआ है।
गिरोह के कुछ सदस्य आसपास के जिलों में उन परीक्षार्थियों की तलाश करते, जिनको परीक्षा में फेल होने का डर था और उन परीक्षार्थियों से कई लाख रुपये लेकर वह उनके स्थान पर गिरोह में शामिल सॉल्वर्स से परीक्षा दिलाता था, जिसके बदले में उन्हें मोटी रकम देता था। अभी तक पुलिसकर्मी का बेटा और उसके तीन साथी पकड़े नहीं गए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मास्टरमाइंड का पिता प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में ड्यूटी पर कार्यरत है। एसपी सिटी अंकित मित्तल ने बताया कि पुलिसकर्मी के बेटे की भूमिका की जांच की जा रही है।
रश्मि को सिपाही पति के मोबाइल से कराई जा रही थी नकल
सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में मोबाइल के जरिए नकल करते हुए पकड़ी गई रश्मि के मोबाइल की जांच में अहम खुलासा हुआ है। परीक्षा देते वक्त वह अपने पति के मोबाइल नंबर पर ही बात कर रही थी, यानी कि उसे नकल पति के मोबाइल नंबर से करवाई जा रही थी। इसकी पुष्टि सीओ क्राइम सुदेश गुप्ता ने की।
सीओ ने बताया कि अब इस एंगल पर जांच की जा रही है कि रश्मि को मोबाइल के जरिए नकल उसका पति ही करवा रहा था या फिर इसके लिए उसने किसी अन्य व्यक्ति की मदद ली थी। जल्द ही इस संबंध में रश्मि के पति से पूछताछ की जाएगी। रश्मि ने पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि जब वह परीक्षा देने के लिए जा रही थी, उस वक्त मोबाइल को उसने कपड़ों में छिपा लिया था, इस वजह से चेकिंग के वक्त पकड़ी नहीं गई।