मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल का कहना है कि आज के दौर में भीड़ का स्वरूप बदल गया है। धार्मिक आयोजन, राजनीतिक कार्यक्रम, परीक्षाएं और अचानक होने वाले विरोध-प्रदर्शन पुलिस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। इन्हें देखते हुए पुलिस की परंपरागत ट्रेनिंग में भी बदलाव किया गया है। अब पुलिस को बल के बजाय संतुलन, संवाद और तकनीक के जरिये भीड़ नियंत्रण की ट्रेनिंग दी जा रही है। लखनऊ में आयोजित पुलिस मंथन कार्यक्रम में भी भीड़ नियंत्रण पर लंबी चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 102 ट्रेनिंग सेंटरों में करीब 60 हजार प्रशिक्षु सिपाहियों की ट्रेनिंग चल रही हैं। सभी जगह एक ही कोर्स पढ़ाया जा रहा है। सिपाहियों के इस बैच को भीड़ नियंत्रण का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षुओं को यह भी सिखाया और दिखाया जा रहा है कि कहां प्रबंधन की लापरवाही के कारण भीड़ अनियंत्रित हुई। इसे समय रहते कैसे ठीक किया जा सकता था। कहां कमियां रहीं और कहां सुधार की जरूरत थी।
उन्होंने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोर्स में लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले समेत अन्य उपायों के साथ ही भीड़ मनोविज्ञान को भी शामिल किया गया है। ताकि पुलिसकर्मी हालात को समझकर निर्णय ले सकें। यह केवल सिपाही की शुरुआती नौकरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीच बीच में नए नए कोर्स से भी उन्हें अपग्रेड किया जाएगा। यह केवल सिपाहियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दरोगा, इंस्पेक्टर, सीओ और आईपीएस अफसरों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके पीछे एक ही मकसद है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ऐसा फोर्स बने जो कानून का पालन करने के साथ ही जनता का विश्वास भी जीते। सभी सेंटरों पर पर्याप्त ट्रेनर हैं। बावजूद इसके बीच-बीच में अनुभवी अफसर भी बैच को ट्रेंड कर रहे है। वो अपने अनुभव भी इनके साथ शेयर करते हैं।
दौड़, पुशअप, रस्सी पर चढ़ने में भी बदलाव
डीजी राजीव सभरवाल ने बताया कि हमने ट्रेनिंग के दौरान दौड़, पुशअप, रस्सी पर चढ़ने में भी बदलाव किया है। प्रशिक्षु को पहले ही दिन दस किलोमीटर दौड़ नहीं लगवा रहे हैं, बल्कि दौड़ को चार चरण में बांटा गया है। जैसे पहले दो माह में पांच किलोमीटर, अगले एक माह में सात किलोमीटर, अगले एक माह में आठ किलोमीटर और अगले एक माह में दस किलोमीटर है। प्रशिक्षु जहां कमजोर हैं, वहां उन्हें मजबूत किया जा रहा है। इसी तरह पुशअप और रस्सी चढ़ने में भी बदलाव किया जा रहा है। सिपाही, दरोगा और सीओ के बैच में भी ऐसा की किया जा रहा है।
-
सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के लिए तैयारियां शुरू
उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। अगले माह मार्च तक परीक्षाएं हो जाएंगी। इसके बाद अगले चरण की प्रक्रिया होगा। फिर चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। उत्तर प्रदेश में सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के लिए 11 प्रशिक्षण तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा इन्हें आउटडोर और इंडोर की ट्रेनिंग देने वाले ट्रेनर भी तैयार किए जा रहे हैं।
साइबर अपराध पर अलग से ट्रेनिंग
साइबर अपराध, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया पर फैलने वाले अफवाहें पुलिस के लिए चुनौती बनी है। साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस विभाग के हर स्तर के कर्मचारी और अधिकारियों को ट्रेनिंग किया जा रहा है। ट्रेनिंग सेंटरों में ही थानों के जैसे साइबर और फॉरेंसिक लैब भी बनाई गई हैं। पुलिस कर्मियों को बुनियादी जानकारी दी जा रही हैं।