पुलिस भर्ती में फर्जीवाड़ा कर नौकरी हथियाने की कोशिश में पांच अभ्यर्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपियों ने पुलिस आरक्षी और पीएसी भर्ती वर्ष 2015 के आवेदन में फर्जी प्रमाण पत्र लगाए थे। पांचों ने शारीरिक और चिकित्सकीय परीक्षा पास कर ली थी। लेकिन शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
तत्कालीन सपा सरकार में वर्ष 2015 में पुलिस आरक्षी एवं पीएसी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। शारीरिक और चिकित्सकीय परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के चरित्र प्रमाणपत्र जमा कराने के अलावा चिकित्सा परीक्षा एवं 10वीं और 12वीं की अंक तालिकाओं का पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सत्यापन कराया। इसमें पांच अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। अभ्यर्थियों ने विभिन्न बोर्ड से हाईस्कूल व इंटर करना दर्शाया था। जबकि इनकी अंकतालिका फर्जी पाई गई। एक अभ्यर्थी की जन्मतिथि और माता-पिता के नाम भिन्न पाए गए। एक अभ्यर्थी के शैक्षिक प्रमाण पत्रों पर दर्शाया गया शिक्षा बोर्ड ही फर्जी निकला। जबकि एक अन्य का यूपी बोर्ड से हाईस्कूल परीक्षा रोल नंबर फर्जी मिला।
इन अभ्यर्थियों के खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट
पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड लखनऊ के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय निरीक्षक लिपिक अरुण कुमार जौहरी ने देहात थाने में बछरायूं थाने के गांव छज्जूपुरा माफी निवासी सचिन, हसनपुर कोतवाली के गांव मंगरौली निवासी राजकुमार, नौगांवा सादात थाने के गांव नालूखुर्द निवासी इंतखाब, रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव पीपली कलां उर्फ रायपुर निवासी अनुज और नौगांवा सादात के गांव दोयजनगर उर्फ कैलबकरी निवासी मोहित कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।