खबरदार! यदि आपकी जमीन कहीं खाली पड़ी है तो उस पर नजर रखें। बाउंड्री कराकर ताला ठोंक लें और हर दूसरे दिन चक्कर जरूर लगाएं। नहीं किसी दिन उस पर कब्जा हो जाएगा और आपको भनक तक नहीं लगेगी। कोई बड़ी बात नहीं कि आपकी जमीन कब्जाने के बाद कोई फर्जी कागज लेकर उल्टा आपसे ही सीना जोरी भी करने लगे।
ऐसा मुमकिन है क्योंकि शहर में एक बहुत बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। जो इसी तरह जमीनों पर कब्जे करता है। आप इंसाफ के लिए भटकेंगे लेकिन मन मसोसकर रह जाएंगे। क्योंकि जिन पर इंसाफ दिलाने का दारोमदार है वो पुलिस खुद इस गंदे खेल में शामिल है। शहर में जमीनों पर कब्जे करने वाले ये गैंग पुलिस अधिकारियों की शह पर ही खड़े हुए हैं।
इन गैंगों में सपा के कुछ नेता, अपराधी और पुलिस के कुछ अधिकारी शामिल हैं। आला पुलिस अफसरों को अंधेेरे में रखकर कुछ जिम्मेदार पुलिस अधिकारी इस खेल को अंजाम दे रहे हैं। खाली पड़ी जमीनों के फर्जी कागज बनवाकर ये गैंग अपराधियों से उन पर कब्जा करा देता है।
मामला पुलिस तक पहुंचता है तो पुलिस भी इन्हीं गैंगों की भाषा बोलती है। ऐसे में पीड़ित के पास समझौते के सिवाए कोई रास्ता नहीं बचता। समझौते के नाम पर यह गैंग पीड़ित से लाखों रुपये वसूलते हैं। जमीनों पर कब्जों के साथ ही किराए के मकान दुकान खाली कराने के नाम पर भी लाखों रुपये में डीलिंग होती हैं।
पिछले दिनों कोतवाली क्षेत्र में एक दरोगा का आडियो सामने आया था जिसमें वह एक युवक को दुकान खाली करने के लिए धमका रहा था। बाद में दुकान खाली नहीं करने पर युवक के खिलाफ कोतवाली में चेन लूट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। शहर के एक डाक्टर से यही गैंग 25 लाख गुंडा टैक्स वसूल चुके हैं। ऐसे दर्जनों मामले हैं। इन खेलों में पुलिस ही नहीं, तहसील और दूसरे महकमे भी शामिल हैं।
"पुलिस का मुख्य काम अपराध नियंत्रण करना है। जमीन के विवादों से पुलिस को दूर रहकर अपना मूल काम करना चाहिए। केवल तब ही ऐसे मामलों में पुलिस का रोल बनता है जब कोई झगड़ा फसाद होने की नौबत हो। लेकिन ऐसा रेयर ऑफ रेयरेस्ट है। यदि कोई पुलिस अधिकारी जमीनों के खेल में लिप्त मिलता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अभी तक मेरे पास सीधे कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर निश्चित तौर पर जांच कराई जाएगी।" - ओंकार सिंह, डीआईजी।
आधी रात पुलिस अफसर ने कराया कब्जा
शहर में तैनात एक जिम्मेदार पुलिस अफसर ने पिछले दिनों आधी रात में खुद खड़े होकर दिल्ली रोड पर एक जमीन पर कब्जा कराया। ये पहला मामला नहीं है, इस अधिकारी के यहां फरियादी बाहर इंतजार करते हैं और जमीनों के मामले लाने वालों की अंदर आवभगत चलती रहती है।
सुबह से लेकर आधी रात तक इस पुलिस अधिकारी के यहां जमीनों के मामलों पर ही डिस्कशन चलता है। मामले पका कर लाने वालों की भी इस खेल में हिस्सेदारी होती है। सपा के कुछ छुटभैय्ये नेता और कुछ ओहदेदारों के साथ ही महकमे के कुछ दरोगा सिपाही भी साहब के लिए पार्टियां तैयार करके लाते हैं। किराए के दुकान मकान खाली कराने से लेकर भूखंडों पर कब्जा कराने तक के मामलों की यहां डील होती है।
शासन तक भी पहुंचे हैं मामले
पुलिस अफसरों के जमीनों के खेल में शामिल होने की शिकायतें शासन तक भी पहुंच चुकी हैं। शासन स्तर से भी ऐसे कई मामलों में स्थानीय अफसरों से सवाल जवाब किए गए हैं। सिविल लाइन में एक जमीन पर कब्जे कराने के मामले में प्रदेश के एक कद्दावर मंत्री ने पुलिस अधिकारी को फटकार लगाई थी।
मंत्री की डांट खाने के बाद इस पुलिस अधिकारी ने उस मामले से पैर पीछे खींचकर आधा घंटा में जमीन मालिक को वापस कब्जा दिला दिया था। मंत्री के फटकार के बाद कुछ दिन तक खामोशी रही लेकिन फिर से इस पुलिस अधिकारी ने जमीनों पर कब्जे कराने का खेल शुरू कर दिया है।
एफआईआर के बहाने बनाया जाता है दबाव
जमीनों पर कब्जा करने वाले इन गैंगों में शामिल पुलिस अधिकारी एफआईआर के नाम पर टारगेट पर दबाव बनाते हैं। मुकदमा दर्ज करके उस पर दबाव बनाया जाता है। उसके घर पर ताबड़तोड़ दबिश दी जाती हैं। पुलिस तब तक प्रेशर बनाकर रखती है जब तक टारगेट को प्रेशर में लेकर वसूली न हो जाए। बाद में काम पूरा होने के बाद ये मुकदमे एफआर कर दिए जाते हैं।
फर्जी वसीयत के बूते रकम की डिमांड
मझोला निवासी अंबुज बंसल ने मझोला थाने में जयप्रकाश गुप्ता निवासी सलेमपुर रामपुर और कुलदीप कुमार व सचिन के खिलाफ मझोला थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। अंबुज ने रिपोर्ट में कहा है कि अभियुक्तों ने उनके पिता की फर्जी वसीयत तैयार कराकर उनकी जमीन को अपने नाम चढ़वा लिया है।