प्रतिवर्ष बढ़ते जा रहे पर्यावरण संकट के लिए कोरोना काल संजीवनी लेकर आया। लॉकडाउन ने पर्यावरण को स्वच्छ कर हम सबको प्रकृति संरक्षण का सबक दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी द्वारा की जा रही तमाम जद्दोजहद के बावजूद नियंत्रण में नहीं आने वाले स्थिति लॉकडाउन के दो माह तक सुकून भरी रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 40 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। इससे दृश्यता में भी बढ़ोतरी हुई और रामनगर तक के पहाड़ दिखाई देने लगे। रामगंगा नदी का काला पानी भी साफ हो गया।
आज विश्व पर्यावरण दिवस है। इस बार माहौल बदला तो पर्यावरण को बनाए रखने की जिम्मेदारी बढ़ गई। साथ ही विभागीय अधिकारियों के लिए भी चुनौती है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि चुनौतियों से निपटने के लिए विभागों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।
विश्व के तीस सबसे प्रदूषित शहरों में थी पीतल नगरी
पर्यावरण में सबसे अधिक परेशानी वायु प्रदूषण की थी। समय-समय पर वातावरण में प्रदूषण की परत बन जाती थी। शहर का वायु गुणवता सूचकांक ज्यादातर समय दो सौ से तीन सौ माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर के बीच दर्ज किया जाता था। बीच-बीच में चार सौ और उससे भी ऊपर चला जाता था। खासकर सर्दियों में तो तीन सौ से ऊपर वायु गुणवता सूचकांक रहता था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि विश्व के तीस सबसे प्रदूषित शहरों में मुरादाबाद का नाम आ गया था।
फिर बढने लगा वायु प्रदूषण कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए जब लॉकडाउन शुरू तो सभी फैक्ट्रियां, कारखाने, पीतल भट्ठियां और वाहन चलना बंद हो गए थे। सभी तरह की गतिविधियां ठप हो गई थीं। इसकी वजह से वायु गुणवता सूचकांक में सुधार आया और एक्यूआई 40 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया था। अब अनलॉक का पहला चरण शुरु हुआ है और धीरे-धीरे सभी तरह की गतिविधियों का संचालन शुरू हो रहा है तो वायु प्रदूषण भी बढने लगा है। तीन जून को वायु गुणवता सूचकांक 71 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
साफ दिखने लगी रामगंगा
रामगंगा नदी के पानी के रंग में सुधार लॉकडाउन ने हवा के साथ रामगंगा की सेहत में भी काफी सुधार किया। औद्योगिक इकाईयों और पीतल भट्ठियों से निकलने वाले रासायनिक पानी की वजह से रामगंगा के पानी का रंग काला हो गया था। ऑक्सीजन की मात्रा में भी सुधार आया है। अधिकारियों के मुताबिक नदी में अन्य प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है।
वायु प्रदूषण के एक्शन प्लान में शामिल है मुरादाबाद
वायु गुणवता सूचकांक को सुधारने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बनाए गए एक्शन प्लान में मुरादाबाद को शामिल किया गया है। जहरीले धुएं पर नियंत्रण, सड़कों की धूल पर नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट, फसल अवशेष व अन्य कचरा जलाने पर रोक, उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, भवन निर्माण व ध्वस्तीकरण पर नियंत्रण प्रमुख है। दीर्घ अवधि के उपायों में सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा, पर्याप्त चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना, मल्टीनेशनल पार्किंग की सुविधा आदि हैं।
इन विभागों के साथ मिलकर हो रहा है कार्य
परिवहन विभाग, एनएचएआई, लोकनिर्माण विभाग, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, वाहन बनाने वाली कंपनियां, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, यातयात पुलिस, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, तेल कंपनियां, वन विभाग, सिंचाई विभाग, कृषि विभाग, नगर विकास विभाग, यूपीएसआईडीसी-डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेंटर, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व हासिंग कंपनी।