करेंसी एक्सचेंज के सौदागरों ने अपना बड़ा गैंग बना लिया था। नोटबंदी के बाद 10 प्रतिशत से शुरू हुआ खेल 50-50 तक पहुंच गया था। कटघर पुलिस के हत्थे चढ़े नोट बंदी के ‘डॉन’ से पुलिस को पता चला है कि इस गैंग में एक दो नहीं, बल्कि 150 से ज्यादा लोग शामिल हैं।
नेता, एक्सपोर्टर और व्यापारी के साथ ही कालेधन के कुबेरों के नाम भी सामने आ रहे हैं। पुलिस ने पूर्व पार्षद राजीव गुंबर और व्यापारी प्रदीप नागपाल को केस में शामिल कर लिया। उनके पास से बरामदगी न होने के कारण केवल विकास भोला और मुनीर के बयानों के आधार पर ही 188 की धारा लगाई।
कमजोर धारा के कारण इन्हें थाने से ही जमानत मिल गई। कटघर पुलिस ने शनिवार की रात लाजपत नगर में चेकिंग दौरान विकास भोला निवासी आदर्श कालोनी और पीतल बस्ती निवासी मुनीर को पकड़ कर उनके कब्जे से 16 लाख रुपये के पुराने नोट बरामद किए थे।
पूछताछ करने पर दोनों नोटों का कोई हिसाब नहीं दे पाए थे। पुलिस ने इनसे पूछताछ की तो सच्चाई उगल दी थी। उन्होंने बताया था कि ये नोट उन्हें पूर्व पार्षद राजीव गुंबर ने दिए थे। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। उन्हाेंने बताया था कि नोट बंदी के बाद 10 प्रतिशत के हिसाब से उन्होंने नोट बदलने का खेल शुरू किया था।
जिसमें रकम बदलने वाले और बदलवाने वालों की संख्या अब तक 150 से ज्यादा हो चुकी है। इसके बाद विकास और मुनीर को पुलिस ने जेल भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने रविवार की रात आदर्श नगर निवासी पूर्व राजीव गुंबर और पंचशील कालोनी निवासी प्रदीप नागपाल को पकड़ लिया। दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई।
इसके बाद पुलिस ने दोनों को केस में शामिल कर लिया। सोमवार को पुलिस ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की और आचार संहिता उल्लंघन की धारा 188 में शामिल कर लिया। हालांकि इस धारा में पुलिस ने दोनों को थाने से ही जमानत दे दी। राजीव गुंबर ने बताया कि विकास गोला उसका पड़ोसी है। लेकिन मैंने नोट नहीं दिए हैं।