पेपर बांटने वालों का का दावा है कि कालेजों से यह प्रश्न कोचिंग संस्थान संचालकों को मुहैया कराए जा रहे हैं। वहां पर पांच सौ से हजार रुपये प्रति पेपर के हिसाब से इन्हें विद्यार्थियों को दिया जाता है। एक दिन पहले मुहैया कराए जाने से विद्यार्थी आसानी से पेपर की तैयारी कर लेते हैं।
विवि अधिकारियों ने बनाई थी गोपनीय जांच समिति
छह मार्च को भी भौतिक विज्ञान की परीक्षा से पहले ही हाथ से लिखे प्रश्न वायरल हो गए थे। उस वक्त विवि अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए गोपनीय जांच समिति बनाने की बात कही थी। इस मामले में अधिकारियों को अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, कि फिर से व्हाट्स एप पर प्रश्नों को वायरल कर दिया गया।