पत्थर दिल बने मां बाप नवजात बच्ची को ट्रेन के कोच में छोड़कर चले गए। थैले में बंद मासूम कोच कंडक्टर को मिली। कंट्रोल रूम को सूचना देने के बाद भी ट्रेन को अटैंड नहीं कराया। टीटीई जैसे तैसे नवजात को संभालते हुए मुरादाबाद तक लेकर आए। बच्ची को मुरादाबाद में जीआरपी के हवाले कर दिया गया। जहां से उसे जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया दिया।
बनारस अहमदाबाद एक्सप्रेस (19408) में लखनऊ से मुरादाबाद का टिकट चेकिंग स्टाफ चढ़ा था। कोच नंबर एस वन, टू और थ्री में टीटीई राजपाल और पांच, छह और सात में मुकेश चौबे की ड्यूटी थी। लखनऊ से एक बार चेक करने के बाद राजपाल ट्रेन को दोबारा चेक करने के लिए आए। हरदोई के नजदीक कोच एस-2 के पहल कंपार्टमेंट से नवजात के रोने के आवाज आई। अपर बर्थ नंबर तीन पर थैले में बंद नवजात रो रही थी।
उस समय कोच में कोई यात्री भी नहीं था। बच्ची मिलने के बाद राजपाल ने मुकेश को घटना के बारे बताया। उन्हाेंने कंट्रोल रूम को सूचना दी। कंट्रोल रूम ने बरेली में ट्रेन अटैंड कराने का मैसेज दिया। बरेली में ट्रेन आधा घंटा खड़ी रही, लेकिन कोई ट्रेन अटैंड करने नहीं पहुंचा। कंट्रोल रूम को फिर सूचना दी गई तो रामपुर में ट्रेन रोककर अटैंड कराने की बात कही गई, लेकिन वहां भी ट्रेन नहीं रुकी।
मुरादाबाद आने पर टीटीई ने बच्ची को जीआरपी के हवाले कर दिया। हरदोई से दोनों टीटीई बच्ची को किसी तरह संभालकर लाए। जीआरपी ने बच्ची को जिला अस्पताल के आईसीयू में एडमिट कराया। इसके साथ ही टिकट लिस्ट के आधार पर बच्ची के परिजनाें के पहचान की कोशिश की जा रही है।