मुरादाबाद। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाग लेने के लिए संभावित प्रत्याशियों ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए लेकिन अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से अधिसूचना जारी नहीं की गई। चुनाव घोषित नहीं होने पर काफी संख्या मेें स्थानीय नेता काफी मायूस हो गए हैं
प्रदेश में नियमानुसार पंचायत चुनाव की तिथि मई माह में समाप्त हो जाएगी लेकिन चुनाव आयोग ने इस मामले में अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की है। ऐसी स्थिति में गांवों की सरकार बनना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। भारतीय प्रधान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. उस्मान ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की मंशा पंचायत चुनाव कराने की नहीं है। उन्होंने इस मामले में लखनऊ बेंच और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कराई थी। सरकार ने तर्क दिया था कि पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कराने के बाद चुनाव कराए जाएंगे। अभी हाईकोर्ट में इस मामले में तीन तारीख पड़ गई्र है। सरकार बहस से दूर भाग रही है। सरकार ने आरक्षण लागू करने के लिए आयोग का गठन नहीं किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद गुंबर का कहना है कि चुनाव लड़ने के लिए संभावित प्रत्याशियों ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए। लोग अपने अपने वोट तैयार करने के लिए शादी, तेरही, जन्मदिन के कार्यक्रमों में शरीक हो रहे हैं। लोगों का मानना था कि मई से पहले पंचायत चुनाव की घोषणा कर दी जाएगी लेकिन प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने बयान दिया कि चुनाव 2027 में होंगे। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। कांग्रेस प्रदेश सरकार को पंचायत चुनाव के मुद्दे पर घेरने का काम करेगी। इस मामले में भाजपा के नेता चुप्पी साधे हुए हैं।
चुनाव समय पर होना चाहिए
महलकपुर निजामपुर के ग्राम प्रधान निरंजन सिंह का कहना है कि चुनाव संविधान का हिस्सा है। संविधान मतदाताओं के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार देता है। लेकिन पांच साल बीतने पर ग्राम पंचायतों के चुनाव की घोषणा नहीं की गई। प्रदेश सरकार को पंचायत चुनाव समय से कराने की पहल करनी चाहिए। वहीं जिला पंचायत सदस्य नरोत्तम सिंह का कहना है कि पांच साल में ग्राम प्रधान और मेंबर की अदला-बदली होती है। नई ग्राम की सरकार में शामिल लोगों को भी गांव में विकास करने का मौका मिलता है। इसलिए समय से चुनाव होना जरूरी है।