मुरादाबाद। कोविड का वायरस श्वसन तंत्र पर सबसे ज्यादा असर करता है। लेकिन जिले में बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या ने ऑक्सीजन आपूर्ति के तंत्र को भी जाम करना शुरू कर दिया है। अचानक बढ़ी ऑक्सीजन की मांग के कारण इसके दामों में भारी इजाफा हुआ है। नतीजा ये है कि एक ओर जहां मरीजों के तीमारदारों की जेब पर इसका बोझ बढ़ा है, वहीं औद्योगिक इकाइयों में भी इसका असर पड़ा है।
कोरोनाकाल में अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूलने वाले गंभीर मरीजों का सांस लेना महंगा हो गया है। ऑक्सीजन की खपत बढ़ने से मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन की कीमतें बढ़ गई हैं। मुरादाबाद में नौ अस्पतालों को सरकारी दाम पर ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है। बाकी करीब 161 अस्पतालों को आपूर्ति होने वाली ऑक्सीजन की कीमत दोगुनी हो गई है। इसका अतिरिक्त बोझ मरीज के तीमारदारों की जेब पर पड़ने लगा है। केवल नौ अस्पतालों को सरकारी दाम पर 17.59 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से आपूर्ति की जा रही है। शेष को सात क्यूबिक मीटर यानी दस किलोग्राम ऑक्सीजन का सिलिंडर ढाई सौ के स्थान पर अब चार सौ रुपये का मिल रहा है। वहीं, इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन 14 रुपये से बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। प्रतिदिन करीब 15 हजार किलो इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन की खपत थी। जो कीमत बढ़ने की वजह से घटकर आठ हजार किलो प्रतिदिन पर आ गई है। इससे पीतल की ढलाई, वेल्डिंग और कारखानों में कामकाज पर असर पड़ा है।
- कोरोना का असर
- 2500 किलोग्राम प्रतिदिन ऑक्सीजन की आपूर्ति पहले
- 5180 किलोग्राम प्रतिदिन ऑक्सीजन की आपूर्ति अब
- 170 अस्पताल सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत, इनके लिए दो प्लांट और बाकी डीलरों के माध्यम से आक्सीजन की आपूर्ति होती है।
- नौ अस्पतालों को सरकारी दाम पर 17.59 रुपये प्रति किलो, जबकि बाकी 161 अस्पताल और एंबुलेंस के लिए चार सौ रुपये क्यूबिक किलोग्राम का सिलिंडर दिया जा रहा है।
- 3 ऑक्सीजन सिलिंडर चाहिए गंभीर मरीज को एक दिन में
20 टन ऑक्सीजन रिजर्व में
- कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित नहीं हुई है। अस्पतालों की मांग के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है। प्रशासन ने बीस टन ऑक्सीजन रिजर्व में रखी है। बड़े नौ अस्पतालों को सरकार के निर्धारित दाम पर आपूर्ति हो रही है।
- डा. एमसी गर्ग, सीएमओ
जिनके यहां टैंक उन्हें सरकारी दाम पर आपूर्ति
- मुरादाबाद में नौ अस्पतालों ने ही लिक्विड ऑक्सीजन स्टोर करने का टैंक बनाया है। इन अस्पतालों को सरकारी दाम पर आपूर्ति हो रही है। बाकी अस्पताल भी टैंक बनाते हैं तो सरकारी रेट पर ऑक्सीजन की सप्लाई दी जाएगी। - नरेश मोहन दीपक, जिला औषधि निरीक्षक
महंगी खरीद रहे हैं ऑक्सीजन
- नर्सिंग होम और एंबुलेंस के लिए ऑक्सीजन महंगी खरीदनी पड़ रही है। पहले सात क्यूबिक मीटर का ऑक्सीजन सिलेंडर ढाई सौ रुपये का मिल रहा था। इसकी कीमत अब चार सौ रुपये पहुंच गई है।
- डा. सीपी सिंह, निजी नर्सिंग होम संचालक
खरीद महंगी है, तो बिक्री भी महंगी है
- मेडिकल ऑक्सीजन सिलिंडर पहले 150 रुपये (सात क्यूबिक मीटर) का मिलता था। अब कीमत बढ़कर 325 रुपये हो गई है। खरीद महंगी होने से बिक्री भी महंगी हो गई है।
- विनय चौधरी, मेडिकल ऑक्सीजन विक्रेता
इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन महंगी होने से बढ़ी कीमत
- काशीपुर, रुड़की और बोकारो से ऑक्सीजन की आपूर्ति कम और कीमत बढ़ गई है। अनुबंधित नौ अस्पतालों को सरकार से निर्धारित रेट 17.40 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर (12 फीसदी जीएसटी टैक्स अतिरिक्त) पर ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जा रही है। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन की कीमत 15 रुपये से बढ़कर 55 रुपये किलो हो चुकी है। कीमत बढ़ने के साथ आपूर्ति भी बाधित है। सरकार ने मेडिकल ऑक्सीजन की कमी होने पर इमरजेंसी में इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन की सप्लाई देने के निर्देश जारी किए हैं। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन महंगी होने से कीमत भी बढ़ रही है। जिन अस्पतालों से अनुबंध नहीं है वहां महंगी सप्लाई हो रही है।
- विपिन क्वात्रा, क्वात्रा इंडस्ट्रियल गैस कंपनी