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ऑक्सीजन की खपत बढ़ने से टूटी सप्लाई चेन, आपूर्ति बाधित, कीमतें दोगुनी

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जिला अस्पताल के इमरजेंसी लगा ऑक्सीजन सिलेंडर। - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। कोरोनाकाल में ऑक्सीजन की खपत बढ़ने से कीमतें दोगुनी पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर मरीजों से लेकर बाजार और कारोबार पर पड़ने लगा है। ऑक्सीजन की कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों में इस वक्त सबसे अधिक खपत है। एबुलेंस चालक भी ऑक्सीजन की कीमत बढ़ने से मरीजों ने मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। इंड्रस्टीज, पीतल के सामान की ढ़लाई और वेल्डिंग कारोबारियों के काम ठप होने लगे हैं।
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मुरादाबाद में ऑक्सीजन की सप्लाई उत्तराखंड के काशीपुर और झारखंड के बोकारो से होती है। ऑक्सीजन लिक्विड में आती है। यहां प्लांटों से उसे एयर में बदला जाता है। प्लांट कारोबारी विपिन क्वात्रा बताते हैं, कोरोनाकाल में ऑक्सीजन की डिमांड दोगुने से अधिक हो गई है। इससे ऑक्सीजन की सप्लाई और कीमत पर असर पड़ा है। विपिन बताते हैं मेडिकल आक्सीजन और इंड्रस्टीज की सप्लाई होने वाले आक्सीजन की कीमत बढ़ गई हैं। मेडिकल ऑक्सीजन 410 रुपये प्रति कैप्सूल सप्लाई हो रही है। जबकि बाजार और कारोबार के लिए पांच सौ से छह सौ रुपये कैप्सूल जा रहा है। मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति अनुबंध की शर्तों पर हो रही है। सरकार ने भी कीमतों पर नियंत्रण किया है। बाजार और इंड्रस्टीज की सप्लाई टेंडर मनमाने कीमत पर कर रहे हैं। एक कैप्सूल में सात क्यूबिक मीटर आक्सीजन आती है।
मुरादाबाद में डेढ़ सौ से अधिक निजी एंबुलेंस चलती हैं। एंबुलेंस चालक वंश अग्रवाल और अजय सैनी बताते हैं, मरीज को अस्पताल छोड़ने के लिए कैप्सूल से करीब दो से तीन क्यूबिक आक्सीजन खर्च हो जाती है। पहले मरीज से सौ से डेढ़ सौ रुपये लेते थे, लेकिन अब ढाई से तीन सौ रुपये ले रहे हैं। अधिकतर एंबुलेंस चालक कंजरी सराय से आक्सीजन सिलेंडर भरवाते हैं। वहां दुकानदार मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। इसका खर्च मरीज की जेब पर पड़ रहा है।
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ऑक्सीजन की खपत वेल्डिंग और पीतल के बर्तनों एवं सजावटी सामान की ढलाई में इस्तेमाल होती है। मुरादाबाद में पीतल की ढलाई का काफी काम है। ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत बढ़ने और आक्सीजन की उपलब्धता नहीं होने से कारोबार पर असर पड़ा है। मुलगपुरा निवासी मो जावेद बताते हैं, आक्सीजन महंगी होने से लागत बढ़ी है, लेकिन ग्राहक कीमत बढ़ाकर देने में आनाकानी करते हैं। कइयों के आर्डर पहले से बुक हैं। ऐसे में कारोबार पर मार पड़ रही है। ऑक्सीजन नहीं मिलने से कइयों के कामधंधे बंद हो चुके हैं।
- ऑक्सीजन की कीमत जरूर बढ़ी है, लेकिन अस्पतालों की सप्लाई बाधित नहीं है। टीएमयू में खुद का प्लांट है। बाकी अस्पतालों को आक्सीजन की आपूर्ति करने वाले टेडर और प्लांट सरकार की गाइड लाइन के अनुसार कर रहे हैं। 24 घंटे में एक मरीज को तीन कैप्सूल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। - डा. एमसी गर्ग, सीएमओ।
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