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ओपीडी सेवाएं बहाल, डाक्टर हैं नहीं, कुछ दिनों तक मरीजों का रहेगा बुरा हाल

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जिला अस्पताल के ओपीडी में लाइन पर खडे लोग। - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल की ओपीडी सेवाएं कोरोनाकाल में छह माह बाद आधी-अधूरी तैयारियों के बीच गुरुवार से बहाल हो गई हैं। कक्षों की साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन के बाद डिस्पेंसरी की जरनल ओपीडी के अलावा बाल रोग, हड्डी रोग और मानसिक रोग विभाग में डाक्टर बैठे। डिस्पेंसरी से ही सामाजिक दूरी अपनाकर माइक की मदद से अधिकतर मरीजों को परामर्श और दवाएं वितरित की गईं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए दो गज की दूरी पर गोले बनाए गए हैं। गोले पर मरीजों को खड़ा करवाने के लिए होम गार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल के सात डाक्टर अब भी कोविड ड्यूटी पर हैं। डाक्टरों के लौटने पर ही चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह बहाल हो पाएंगी।
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मार्च से जिला अस्पताल की ओपीडी सेवाएं बंद रही हैं। इमरजेंसी के अलावा रोस्टर से डाक्टर डिस्पेंसरी में बैठते थे और वहीं से मरीज देखते थे। कोरोना आशंकित मरीजों के लिए अलग से स्क्रीनिंग की ओपीडी भी चल रही थी। गुरुवार से सभी ओपीडी सेवाएं बहाली के निर्देश के बाद दीनदयाल संयुक्त जिला अस्पताल में भी आधी अधूरी तैयारियों के बीच ओपीडी सेवाएं बहाल हो गईं। सुबह आठ बजे अस्पताल में सैनिटाइजेशन होने के बाद बाल रोग, हड्डी रोग, मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में डाक्टर बैठे। शुगर की जांच और परामर्श के अलावा आयुर्वेद विभाग की ओपीडी भी खुली। मरीजों की संख्या बेहद कम थी। कोविड हेल्प डेस्क से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क पहनने के साथ ओपीडी सेवाएं बहाल होने का अनाउसमेंट किया गया।
अस्पताल पहुंचने वाले अधिकतर मरीज रोजाना की तरह डिस्पेंसरी की ओपीडी में ही पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे के बाद बाल रोग विभाग में मरीज पहुंचने लगे। बाल रोग विभाग में पहले दिन 12 मरीज देखे गए। डिस्पेंसरी के साथ-साथ सभी ओपीडी में करीब चार सौ मरीज आए। ओपीडी के अलावा ईसीजी, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी भी खुली रही।
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ईएनटी और नेत्र रोग की ओपीडी इसी सप्ताह खुलेगी : डा. सिंह
मुरादाबद। सीएमएस डा. कल्पना सिंह ने बताया कि नाक, कान, गला और आंख के मरीज सोशल डिस्टेंसिंग से देखना संभव नहीं है। इन मरीजों की जांच करने के लिए डाक्टर को मरीज के नजदीक जाना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ईएनटी और नेत्र रोग की ओपीडी संचालन को लेकर रणनीति बनाने में जुटा है। सोमवार तक ओपीडी शुरू हो जाएंगी। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की ओपीडी पर्चे अभी पृथक काउंटर से नहीं बनाए जाएंगे। मरीज जिस ओपीडी में जाएगा वहीं उसका पर्चा बनेगा।
आधे से कम डाक्टर, चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा असर : डा. राजेंद्र
मुरादाबाद। एमएस डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल में पहले से ही डाक्टरों की संकट है। स्वीकृत 42 पदों के सापेक्ष 24 डाक्टरों की तैनाती है। इनमें भी सर्जन डा. शिव सिंह रामपुर, बाल रोग विशेषज्ञ डा. अशोक कुमार अमरोहा और एनेस्थेटिक्स डा. आरएस गंगवार संभल के बतौर नोडल अधिकारी कोविड ड्यूटी पर है। चेस्ट फिजिशियन डा. प्रवीण कुमार, एनेस्थेटिक्स डा. प्रवीण कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. शोभित और ईएमओ डा. अवनीश कुमार की कोविड टू में कोरोना ड्यूटी है। 24 डाक्टरों में सात डाक्टर अस्पताल से बाहर ड्यूटी पर हैं। 17 डाक्टरों में ओपीडी, इमरजेंसी, पोस्टमार्टम की ड्यूटी करवानी है।
- मां विमला देवी के सिर में दर्द रहता है। पहले कभी चोट लगी थी। मानसिक रोग विभाग में दिखाना था। सुबह नौ बजे मां को लेकर अस्पताल पहुंचा। ओपीडी में दिखाने के बाद दवा ली और जांच भी कराई। - प्रशांत शर्मा, भरावली गांव
- बेटे फजल को एक हफ्ते से बुखार है। निजी डाक्टर को दिखाया तो फायदा नहीं हुआ। बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया तो उन्होंने बताया कि विटामिन डी की कमी है और दवाएं भी दी। - रानी, करूला
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अस्पताल जाना है तो क्या करें
- मास्क पहनकर जाएं और अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें
- तीमारदारी के लिए बच्चे और बुजुर्ग, गर्भवती को साथ ले जाने से बचें
- अस्पताल में किसी भी वस्तु, रैलिंग, दरवाजे, खिड़की और सतह को छूने से बचें
- यदि कोई जरूरी जांच नहीं करवानी है तो पौष्टिक नाश्ता कर जाएं
- अस्पताल से बाहर निकलते ही हाथों को सैनिटाइज करें और घर आकर नहाएं
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