मुरादाबाद। कोरोना संकट में बीच जिले को दिसंबर तक जनसंख्या का भी नया रूप देखने को मिलेगा। जिले की आबादी में करीब डेढ़ लाख नए मेहमान शामिल हो जाएंगे। ऐसे में इस संकट के बीच उनके लिए जरूरी चीजों को जुटाने का भार भी हमारे संसाधनों पर पड़ेगा। यदि जिले में प्रति हजार बच्चों की मृत्यु दर की गणना करें तो फरवरी तक पंजीकृत गर्भवतियों के मुकाबले दिसंबर तक 97747 शिशु जन्म लेने के बाद जीवित बचेंगे। इसमें निजी चिकित्सालयों में जन्म लेने वाले बच्चों को शामिल करें तो संख्या करीब डेढ़ लाख पहुंचेगी।
स्वास्थ्य विभाग का अनुमान है कि नवंबर-दिसंबर में जिले में प्रजनन के मामले बढ़ेंगे। इसके संकेत विश्व स्वास्थ्य संगठन भी भारत के संदर्भ में दे चुका है। लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य इन संकेतों के बाद इसलिए चिंतित है क्योंकि जिले में देश और प्रदेश की तुलना में प्रजनन दर कहीं अधिक है। यदि जनसंख्या का यह विस्फोट होता है तो यह बढ़ी समस्या खड़ी करेगा। मुरादाबाद जिले में एक हजार महिलाओं पर प्रजनन दर 25.2 है। यह दर प्रदेश और देश से कहीं अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 15 साल से 49 साल उम्र तक की महिलाएं बच्चे को जन्म दे सकती हैं। एक महिला की इस अवधि में प्रसूता बनने की दर देश में 2.2 है, जबकि मुरादाबाद में 3.6 है। उत्तर प्रदेश में यह दर 2.7 है। यानी मुरादाबाद में एक दंपती के जीवनकाल में बच्चे पैदा करने की दर सबसे अधिक है। इसे साधारण तौर पर औसत में देखें तो देश में जहां प्रति दंपती दो संतानें पैदा की जा रही हैं, वहीं मुरादाबाद में औसतन प्रति दंपती तीन या चार संतानें पैदा की जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग में फरवरी तक एक लाख तीन हजार गर्भवतियों का पंजीकरण हुआ है। इनके गर्भ की अवधि तीन माह या उससे अधिक है। मुरादाबाद में जन्म लेने वाले प्रति हजार बच्चों में 51 की मृत्यु हो जाती है। इस लिहाज से करीब एक लाख तीन हजार गर्भवतियों ने यदि एक बच्चे को भी जन्म दिया तो उनमें से 97747 बच्चे जीवित बचेंगे। इनमें यदि अनुमानित तौर पर निजी अस्पतालों में जन्म लेने वालों की संख्या भी जोड़ ली जाए तो यह संख्या करीब डेढ़ लाख होगी। फरवरी के बाद से नई गर्भवतियों की गणना को ब्रेक लग गया है। मार्च से जून तक लॉकडाउन के कारण घर-घर सर्वे नहीं किया गया है। जुलाई से इसे शुरू किया है। इस दौरान नए गर्भधारण करने वाली महिलाओं की संख्या आने के बाद दिसंबर तक मुरादाबाद की आबादी में करीब दो लाख तक की वृद्धि हो सकती है।
सीएमओ बोले -
सीएमओ डा. एमसी गर्ग के मुताबिक कोरोनाकाल का जनसंख्या वृद्धि दर में असर पड़ा है। कोरोना से होने वाली मृत्यु दर की तुलना में कहीं अधिक प्रजनन दर बढ़ी है। नवंबर से दिसंबर माह के बीच जनसंख्या दर बढ़ने से इसका असर दिखेगा। परिवार नियोजन को लेकर गंभीरता कम दिखी है। सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। अनचाहा गर्भ ठहरने पर भी गर्भपात नहीं कराया। कोरोना के डर से लोग अस्पताल आने से कतरा रहे हैं।
- कोरोनाकाल में प्रजनन दर बढ़ी और इसका असर जनसंख्या वृद्धि पर पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग में एक लाख तीन हजार गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। कोरोनाकाल के बाद से एएनएम और आशा वर्कर कोविड ड्यूटी पर हैं। लिहाजा, मार्च के बाद गर्भवती हुई महिलाओं का सटीक आंकड़ा अभी विभाग के पास नहीं है। वैसे भी तीन महीने के गर्भ के बाद ही महिलाएं एएनएम और आशा के संपर्क में आती हैं। जुलाई से घर-घर सर्वे शुरू किया गया है। इसमें गर्भवती महिलाओं का आंकड़ा सामने आ पाएगा।
- रघुवीर सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक।
देश-प्रदेश और मुरादाबाद में प्रजनन एवं मृत्यु दर
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प्रजनन और शिशु एवं गर्भवती मृत्यु दर भारत उत्तर प्रदेश मुरादाबाद
प्रजनन दर (एक हजार महिलाओं पर) 19 22.6 25.2
मृत्यु दर महिला (एक हजार गर्भवती पर) 7.3 6.7 6.0
मृत्यु दर शिशु (एक हजार शिशुओं पर) 33 41 51
लिंग अनुपात (एक हजार पुरुषों पर) 940 912 906
प्रति दंपती प्रजनन दर (15 साल से 49 साल) 2.2 2.7 3.6
(2011 के आंकड़ों के अनुसार प्रतिशत में)
वर्ष जनंसख्या वृद्धि दर
1901 854,603 —
1911 905,439 +0.58
1921 859,151 -0.52
1931 920,336 +0.69
1941 1,055,828 +1.38
1951 1,190,434 +1.21
1961 1,423,487 +1.80
1971 1,747,420 +2.07
1981 2,257,867 +2.60
1991 2,965,293 +2.76
2001 3,810,983 +2.54
2011 4,772,006 +2.27
- 2011 की जनगणना में मुरादाबाद में चंदौसी और संभल दो तहसीलें शामिल थीं। संभल के रूप में नया जिला बनने के बाद उनकी जनसंख्या को मुरादाबाद में नहीं जोड़ा जाता। इस आधार पर मुरादाबाद जिले की जनसंख्या 3126507 मानी जाएगी।
- 2011 की जनगणना के मुताबिक जनसंख्या के आधार पर इलाहाबाद में बाद मुरादाबाद दूसरे स्थान पर था।
- देश भर के 640 जिलों में जनसंख्या के आधार पर मुरादाबाद का स्थान 26वां था।