ट्रेनों का बोझ झेल नहीं पा रहीं पुरानी पटरियां
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रेलवे को आधुनिक बनाने के दावे तो बहुत किए जा रहे हैं, लेकिन जिन पटरियों पर ट्रेन दौड़ाई जा रहीं हैं। उनकी सेहत दुरुस्त नहीं है। आए दिन हो रहे हादसे इसी ओर इशारा कर रहे हैं। मुरादाबाद मंडल में 27 सौ किलोमीटर पटरियाें में मात्र 190 किलोमीटर नई पटरियां ही बिछाई जा सकी हैं। बाकी सभी पटरियां अभी पुराने जमाने की हैं। इससे यात्रियों की जान खतरे में हैं।
रेलवे इंजीनियरों के मुताबिक, गर्मियों में रेल पटरियां फैलती हैं। इन पटरियों को टूटने से रुकने के लिए जोड़ों के बीच गैप दिया जाता है। जबकि सर्दियों में पटरियां सिकुड़ती हैं। इस दौरान गैप में टुकड़े डालकर वेल्डिंग किया जाता है। लेकिन अधिक बोझ की वजह से पटरियां गर्म होकर चटक जाती हैं और वेल्डिंग भी खुल जाते हैं। पटरी फ्रेक्चर और वेल्डिंग फ्रेक्चर हो जाते हैं। इंजीनियरों की माने तो सबसे ज्यादा पटरियां चटकने की वजह पुरानी व जर्जर पटरियां हैं। इन पटरियों पर ट्रेनों को अधिक दौड़ाया जा रहा है।
पटरियाें को आराम नहीं मिल पा रहा है। पटरियों के सपोर्ट में साढ़े तीन इंच की गिट्टियां बिछाई जाती हैं। लेकिन समय के साथ इनका साइज भी सामान्य से कम हो जाता है। जिसकी वजह से ये भी पटरियाें का सपोर्ट छोड़ने लगती हैं। मुरादाबाद रेल मंडल में 27 सौ किलोमीटर रेल पटरियां हैं। पिछले दिनों रेल मुख्यालय की टीम ने निरीक्षण के बाद 210 किलोमीटर रेल लाइन को जर्जर घोषित कर नई पटरियां बिछाने को कहा था। इनमें से केवल 190 किलोमीटर पटरियां ही नई बिछाई गई है।
जबकि बाकी पटरियां 1992-2008 के बीच की हैं। इन पटरियों में ही सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। इन पटरियों का भार भी 52 किलोग्राम बताया जा रहा है। जबकि नई पटरियां 60 किलोग्राम भार की हैं। नई पटरियां भारी और मजबूत बताई जा रही हैं। डीआरएम एके सिंघल ने बताया कि पुरानी पटरियां हटाकर नई पटरियां बिछाने का कार्य किया जा रहा है।