मुरादाबाद। कोरोना के कारण बंद चल रहे स्कूलों में भी कंपोजिट फीस के नाम पर तमाम मदों में शुल्क दे रहे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेदी ने मंगलवार को सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों की ओर से ऑफलाइन की तमाम मदों में की जा रही शुल्क वसूली पर रोक लगा दी है। सभी विद्यालयों से 20 मई के शासनादेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
विद्यालय बंद होने के बावजूद कई विद्यालय क्रीडा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय आदि मदों में शुल्क ले रहे थे। अभिभावक लगातार इसका विरोध कर रहे थे। विद्यालयों ने शुल्क वसूली के लिए कंपोजिट शुल्क के नाम पर इन सभी मदों का शुल्क जोड़ लिया था। आठ जून के अंक में अभिभावकों की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद आठ जून को ही अभिभावकों ने मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के नेतृत्व में ऑनलाइन पढ़ाई में स्कूलों द्वारा ऑफलाइन पढ़ाई का शुल्क वसूलने के विरोध में जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन दिया था। उन्होंने ऐसी मदों में शुल्क वसूली पर रोक लगाने की मांग की थी जिनका उपयोग केवल विद्यालय खुलने पर ही संभव है।
संयोजक अनुज गुप्ता का कहना है कि 20 मई केे उप्र सरकार द्वारा दिशा-निर्देश का कोई भी विद्यालय पालन नहीं कर रहा है, जिसमें उन्होंने जब तक विद्यालय में भौतिक रूप से ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन नहीं होता, तब तक परीक्षा शुल्क न लेने, विद्यालय बंद होने की अवधि तक क्रीडा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कंप्यूटर और वार्षिकोत्सव आदि का शुल्क नहीं लेने के निर्देश दिए थे। स्कूल संचालकों ने फीस कटौती का यह कहते हुए मना कर दिया था कि सिर्फ शिक्षण शुल्क लिया जा रहा है, अन्य मद में फीस नहीं ली जा रही है, जबकि अधिकांश स्कूल संचालकों ने अन्य मदों में ली जाने वाली फीस को शिक्षण शुल्क में समायोजित कर कंपोजिट फीस लेना शुरू कर दिया है।
मंगलवार को जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेदी ने माध्यमिक, सीबीएसई और आईसीएसई के सभी विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्यों को पत्र जारी करते हुए कहा है कि कोरोना संक्रमण के कारण अनेक अभिभावकों की नौकरी छूट गई है या उनके व्यापार को नुकसान हुआ है। ऐसे में कई अभिभावक पूरा शुल्क देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में सभी स्कूलों में 20 मई के आदेश का पालन करना अनिवार्य है। इस शासनादेश का पालन करने में शिथिलता न बरती जाए।