प्रदेश में गन्ने की सभी प्रचलित प्रजातियों का डीएनए सुरक्षित रखा जाएगा। गन्ने की प्रजातियों को लेकर लगातार हो रहे विवादों के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है। चीनी मिलें अक्सर अगैती किस्मों को सामान्य बताकर गन्ने की कीमत कम कर देती हैं।
किसानों के साथ तब बड़ा धोखा होता है, जब मिलें सामान्य प्रजाति के गन्ने को खरीदने से ही इंकार कर देती हैं। नई व्यवस्था से गन्ने की प्रामाणिक पहचान होने के बाद विवादों के निस्तारण आसान होगा और चीनी मिलें किसानों को छल नहीं पाएंगी।
उत्तर प्रदेश में गन्ने की 50 प्रजातियों की बुआई होती है। इनमें 23 अगैती जबकि 27 सामान्य प्रजातियां हैं। गन्ना शोध संस्थान नई किस्मों को भी लांच करता है। शुगर लॉबी भी नई किस्में किसानों को देती है। गन्ने की प्रजातियों को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार विवाद हो रहे हैं।
मिलें अगैती किस्मों को सामान्य बताकर गन्ने के रेट कम लगाती हैं। सामान्य प्रजाति को ‘रिजेक्ट’ करके खरीदने से ही इंकार कर दिया जाता है। मौजूदा पेराई सत्र में भी प्रजातियों को लेकर कई इलाकों में बवाल हुआ।
गन्ना विभाग ने इस विवाद का हल खोज लिया है। अब सभी गन्ना किस्मों का डीएन रिकॉर्ड रखा जाएगा। गन्ना शोध परिषदों में हर किस्म की वैज्ञानिक पहचान मौजूद होगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।