आइसोलेशन कोच (सांकेतिक तस्वीर)
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मुरादाबाद में अप्रैल-मई माह में रेलवे द्वारा तैयार किए आइसोलेशन कोचों में आठ माह बाद तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। चूंकि उस समय रेलवे ने तेजी से फैलती महामारी के दृष्टिगत आपातकालीन स्थिति के लिए ये कोच तैयार किए थे। इसलिए यह राहत की बात है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई कि इन कोचों में मरीजों को भर्ती करना पड़े।
मुरादाबाद में दो एसी कोच समेत इस प्रकार के 22 कोच खड़े किए गए थे। इसके अलावा रेल मंडल नजीबाबाद स्टेशन पर 12 आइसोलेशन कोच समेत कुछ कोच अन्य स्थानों पर भी भेजे गए थे। आंकड़ों के मुताबिक मंडल में तैयार किए गए कोचों की संख्या 70 है। रेलवे ने प्रत्येक कोच को आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए दो-दो लाख रुपये खर्च किए हैं। ये आइसोलेशन कोच मुरादाबाद यार्ड में ज्यों के त्यों खड़े हैं।
चूंकि इन कोचों का इस्तेमाल अभी तक मरीजों को भर्ती करने के लिए नहीं किया गया। इसलिए महामारी के बाद इनके वैकल्पिक प्रयोग पर विचार किया जा सकता है। गौरतलब है कि प्रत्येक कोच में आठ मरीजों के उपचार की व्यवस्था है। सहायक वाणिज्य प्रबंधक नरेश सिंह का कहना है कि यदि जरूरत पड़ेगी तो इन कोचों का इस्तेमाल किया जाएगा। कोचों को अन्य किसी प्रयोग में लेने के लिए जोनल स्तर से दिशा-निर्देश अनिवार्य हैं।
बनाया जा सकता है चलता फिरता अस्पताल
रेल उपभोक्ता परमार्शदात्री समिति के सदस्य मोहम्मद अजीम का कहना है कि इन कोचों में आक्सीजन सिलेंडर, मरीज को ड्रिप चढ़ाने संबंधी सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसलिए इन कोचों का प्रयोग चलते फिरते अस्पताल के रूप में किया जा सकता है। इससे दुर्घटना की स्थिति में तत्काल ऐसे कोचों को दुर्घटना स्थल पर भेज कर घायलों को उपचार मुहैया कराया जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों के हित के लिए परामर्शदात्री समिति इस सुझाव को रेलवे के समक्ष रखेगी।