मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रफ्तार में कमी आने के साथ ही विशेषज्ञों ने तीसरी लहर के आने के संकेत भी दे दिए हैं। तीसरी लहर की महामारी से लड़ने के लिए सरकारी इंतजाम के नाम पर छह बाल रोग विशेषज्ञ और जिला अस्पताल में 24 बेड का वार्ड है, जहां ऑक्सीजन बेड नहीं हैं। फिलहाल मौजूदा इंतजाम यही है, जबकि जीरो से पंद्रह साल के बच्चों की संख्या 10.81 लाख है। हालांकि महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के दावे तमाम हैं, लेकिन इन आंकड़ों को देखें तो औसतन 45 हजार बच्चों के लिए एक बेड और 1.80 लाख बच्चों के लिए एक चिकित्सक है।
अप्रैल में शुरू हुई कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अब उतार पर है। संक्रमित मरीजों की संख्या घटने लगी है। पॉजिटिव मरीजों से भरे सरकारी और निजी अस्पतालों के बेड भी खाली होने लगे हैं। दिन का कोरोना कर्फ्यू हटा लिया गया है। बाजार फिर से खुल गए हैं। इन सबके बीच विशेषज्ञों ने अगस्त में संक्रमण की तीसरी लहर के आने के भी संकेत दिए हैं। जिसे लेकर शासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। लेकिन मौजूदा समय में सरकारी इंतजाम तीसरी लहर से लड़ने के लिए नाकाफी दिख रही है।
जिले में वर्तमान समय में सिर्फ छह बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसमें चार डॉक्टर जिला अस्पताल, एक महिला अस्पताल और एक चिकित्सक बिलारी सीएचसी में तैनात हैं। बच्चों के वार्ड के नाम पर जिला अस्पताल में 24 बेड हैं। जहां ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं है। जरूरत के समय ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाया जाता है। दूसरी ओर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में जीरो से 15 साल के बच्चों की संख्या 10.81 लाख है। ऐसे में इस सरकारी इंतजाम से इतनी बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में मुश्किल होगी।
इस महीने एक चिकित्सक हो जाएंगे सेवानिवृत्त
जिला अस्पताल में चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें एक बाल रोग डॉ. राजेंद्र कुमार के पास प्रशासनिक जिम्मेदारी हैं, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीर सिंह, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. एसके सक्सेना ओपीडी और आईपीडी देखते हैं। इनमें डॉ. एसके सक्सेना इस महीने सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
--
ग्रामीण इलाकों में सिर्फ बिलारी सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ
जिले की सीएचसी-पीएचसी पर विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। विशेषज्ञ डाक्टर के नाम पर बिलारी सीएचसी पर एक बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. संदीप गुप्ता की तैनाती है, जो सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी भी हैं। वहीं, महिला अस्पताल में संविदा पर चार बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर हैं, जिनके पास एसएनसीयू की जिम्मेदारी है।
--
जिला अस्पताल में 187 बेड, ऑक्सीजन युक्त बेड सिर्फ तीस
जिला अस्पताल में कुल 187 बेड हैं। इसमें इमरजेंसी से लगाए जनरल और प्राइवेट वार्ड तक शामिल हैं। लेकिन ऑक्सीजन बेड सुविधा हर वार्ड में नहीं है। सिर्फ तीस बेड ही ऑक्सीजन वाले हैं। बाकी बेडों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतजाम है।
--
ऑक्सीजन बेड के लिए शासन को भेजा प्रस्ताव
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पहले शासन को ऑक्सीजन बेड के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें अस्पताल के सभी बेड को ऑक्सीजन बेड बनाने की योजना है। सबसे पहले चिल्ड्रेन वार्ड के 24 बेड ऑक्सीजनयुक्त किए जाएंगे।
--
तीस फीसदी बेड ऑक्सीजनयुक्त होना जरूरी
नियमानुसार सरकारी अस्पतालों में कुल बेडों की संख्या के तीस फीसदी ऑक्सीजन युक्त बेड होने चाहिए। लेकिन जिला अस्पताल में तीस फीसदी बेड भी ऑक्सीजन युक्त नहीं है। यहां 187 बेड हैं। इसमें तीस बेड ही ऑक्सीजन युक्त है, जबकि तीस फीसदी के हिसाब से यहां 56 बेड ऑक्सीजन वाले होने चाहिए।