मुरादाबाद। विवादों में घिरे मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात की जांच कर रही समिति ने बैंकों से दस वर्षों के ब्यौरा को मंगाया है। इसमें विदेशी फंडिंग के सबूत नहीं मिले हैं लेकिन देसी फंडिंग से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस मामले में समिति मदरसा प्रबंधन से पूछताछ करेगी। पाकबड़ा के लोधीपुर राजपूत स्थित मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात के प्रबंधन पर छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने के आरोप की जांच के दौरान विदेशी फंडिंग की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद डीएम अनुज सिंह ने एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में कमेटी गठित की। इस कमेटी ने मदरसा प्रबंधक से पहले तीन साल सा ब्यौरा मांगा था। चार खातों की जांच में कमेटी के हाथ कुछ खास नहीं लगा। इस मामले में एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने मदरसा संचालक से पैन कार्ड मांगकर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान समिति ने मदरसे का दस साल का ब्यौरा बैंकों से मंगाया है। इसमें पेटीएम के लेनदेन का हिसाब पकड़ में नहीं आ रहा है। समिति का मानना है कि मदरसा प्रबंधन ने स्थानीय तौर पर करोड़ों का लेनदेन किया है। फिर भी इसका स्पष्ट ब्यौरा नहीं मिल रहा है। विदेशी फंडिंग के सबूत नहीं मिले हैं। कुछ आशंकाओं का निराकरण करने के लिए इस मामले में मदरसा प्रबंधन से पूछताछ करेगी। आवश्यकता पड़ने पर 13 साल का भी ब्यौरा बैंकों से मांगा जाएगा।
कमेटी में शामिल मुख्य कोषाधिकारी रेनू बौद्ध, एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह और एडीएम सिटी इस मामले में शीघ्र बैठक करेंगे। एडीएम प्रशासन संगीता गौतम का कहना है कि जांच अभी जारी है। इस मामले में अभी 10 साल पहले का ब्यौरा मंगाया गया है। इधर मदरसा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मामले में चार्जशीट लगाने की तैयारी चल रही है।