फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाइट्राइट ने ऑक्सीजन लेवल किया कम, इस वजह से गोवंशाें ने तोड़ा दम

विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा जिले की सांथलपुर गोशाला में 61 गोवंश की मौत शरीर में नाइट्रेट औक नाइट्राइट की मात्रा बढ़ जाने के कारण ऑक्सीजन लेवल में आई कमी के चलते मल्टी ऑर्गन के फेल होने के कारण हुई है। भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई ) बरेली के तीन चिकित्सकों की टीम ने गोवंश के परीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंची है।
विज्ञापन

सांथलपुर की गोशाला में बृहस्पतिवार हुई 61 गोवंश की मौत की गूंज शासन तक पहुंची थी। जिसके बाद शासन ने जांच के आदेश दिए थे। गोवंश की मौत का कारण जानने के लिए मंडल भर के पशु चिकित्सकों के अलावा आईवीआरआई बरेली से तीन डॉक्टरों की टीम भी बृहस्पतिवार की रात ही मौके पर पहुंच गई थी। टीम में शामिल डॉ. एजी तिलंग, डॉ. एम स्वामीनाथ और डॉ. आर रघुवरन ने गोशाला पहुंच कर वहां निरीक्षण किया और मृत पशुओं का पोस्टमार्टम भी। परीक्षण में पाया गया कि गोवंश ने जो चारा खाया था उसमें नाइट्रेट की मात्रा अधिक थी जो पशुओं के पेट में जाकर नाइट्राइट में बदल गई। इससे मेट हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ गई और शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम हो गया। जिसके कारण कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। इस वजह से गोवंश की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गोवंश के पेट में अधिक मात्रा में चारा पाया गया।
आईवीआरआई बरेली के चिकित्सकों की टीम ने दो पशुओं का पोस्टमार्टम किया। जिसमें पेट फूला पाया गया। शरीर के भीतर के लीवर, किडनी, हार्ट, मसल्स में हैमरेज पाया गया।
विज्ञापन

चारे में 100 गुना अधिक मात्रा में मिला नाइट्रेट-नाइट्राइट
मुरादाबाद। आईवीआरआई बरेली के चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम के दौरान गोवंश को खिलाए गए हरे चारे और उनके पेट से चारे का सैंपल का बरेली स्थित लैब में परीक्षण किया तो उसमें भी नाइट्रेट और नाइट्राइट की मात्रा 100 गुना तक अधिक मिली।
आईवीआरआई के तीन चिकित्सकों की टीम ने मौके पर पहुंच कर परीक्षण, दो गोवंश का पोस्टमार्टम किया। गोवंश को खिलाए गए और उनके पेट से चारे का सैंपल लेकर परीक्षण किया। जिसमें नाइट्रेट और नाइट्राइट की मात्रा 100 गुना तक अधिक मिली है। इस वजह से गोवंश का मल्टी ऑर्गन सिस्टम फेल हो गया। इस वजह से उनकी मौत हो गई। जांच के लिए लीवर, किडनी, लंग हार्ट, पेट के कंटेंट का बिसरा जांच के लिए प्रिजर्व किया गया है। सोमवार तक उसकी रिपोर्ट आएगी। चारे में बाहर से कई जहरीला पदार्थ मिलाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
डॉ. केपी सिंह,
संयुक्त निदेशक, पशु रोग निदान केंद्र आईवीआरआई, बरेली
पशु रोग निदान केंद्र आईवीआरआई बरेली के संयुक्त निदेशक केपी सिंह ने कहा कि हरे चारे में नाइट्रेट की मात्रा होती है। चारे वाले खेत में अगर यूरिया डाली गई हो या फिर सीवर के पानी से सिंचाई की गई हो तो चारे में नाइट्रेट की मात्रा काफी बढ़ जाती है। नाईट्रेट पशुओं के पेट में जाकर नाइट्राइट की मात्रा को बढ़ा देता है। जिससे पशुओं के शरीर में मेट हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है और ऑक्सीजन का प्रभाव कम हो जाता है। अगर पशु भर पेट ऐसा हरा चारा खा ले तो उसकी तीन-से चार घंटे बाद मौत हो सकती है। अगर हरे चारे में भूसा अथवा सूखा चारा मिलाकर दिया जाए तो उसका प्रभाव कम हो जाता है। उन्होंने पशुपालकों को हरे चारे के साथ भूसा मिलाकर ही पशुओं को देने की सलाह दी।
नाइट्रेट और नाइट्राइट नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के मेल से बनते हैं। जब नाइट्रोजन का एक अणु ऑक्सीजन के तीन अणुओं से मिलता है, तो नाइट्रेट बनता है। इसी तरह नाइट्रोजन का एक और ऑक्सीजन के दो अणु मिलकर नाइट्राइट बनता है। हरे चारे में नाइट्रेट होता है। बारिश कम होने अथवा खेत में उर्वरक आदि का प्रयोग करने से इसकी मात्रा बढ़ जाती है। पशुओं के पेट में जाकर यह नाइट्राइट में बदल जाता है। पेट में मौजूद अम्ल के साथ मिल कर यह जहरीला हो जाता है। इससे मेट हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है। जिसके कारण ऑक्सीजन का लेवल हो जाता है। ऑक्सीजन का स्तर कम होने से कई अंग काम करना बंद कर देते हैं, जो जानलेवा होता है।
विज्ञापन

-डॉ. प्रेम सिंह,
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें