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बिलारी में छह माह से पशुओं को न मिला हरा चारा और न दलिया

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कांठ के सादकपुर स्थित गोशाला में बीमार पशु का उपचार करते पशु चिकित्सक। संवाद - फोटो : KANTH
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अमरोहा जनपद के सांथलपुर गांव की गोशाला में विषैला चारा खाने से 55 गोवंशों की मौत हो जाने की घटना के बावजूद बिलारी ब्लॉक के भूड़मरेशी गांव की राजकीय गोशाला की खामियां दूर करने को लेकर पंचायतराज विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। यहां बीते छह माह से गोवंश को न तो हरा चारा मिला है और न ही दलिया। बदहाली का आलम यह है कि पशु जो सूखा भूसा खा रहे हैं वह भी पानी से भीगा हुआ और रेत तथा मिट्टी मिला हुआ।
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भूड़मरेशी गांव से लगभग दो किमी दक्षिण में ग्राम समाज की भूमि में राजकीय गोशाला बनी हुई है जिसका संचालन पंचायतराज विभाग के अधीन बिलारी ब्लॉक के अधिकारी कर रहे हैं। गोशाला में इस समय 32 गोवंश हैं। केयर टेकर हर्रू सिंह का कहना है कि भूसा भी ऐसा भेजा गया है जिसमें रेत और मिट्टी मिली हुई है। बीते छह माह से पशुओं को हरा चारा खिलाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मुझे बीते तीन माह से मानदेय का एक भी रुपया नहीं मिला। शुक्रवार दोपहर जब बिलारी के एसडीएम राजबहादुर सिंह भूड़मरेशी गांव की राजकीय गोशाला का निरीक्षण करने पहुंचे तब उन्हें भी ऐसी ही खामियां मिलीं।
भूड़मरेशी गांव की राजकीय गोशाला का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाएं लचर मिली हैं। पशुओं को हरा चारा खिलाने की सही व्यवस्था नहीं मिली है। खंड विकास अधिकारी बिलारी को निर्देश दिया गया है कि वह स्वयं तत्काल जाकर निरीक्षण करें और जरूरत के अनुसार गोशाला में व्यवस्थाएं ठीक करें।
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राजबहादुर सिंह उपजिलाधिकारी बिलारी
चकहबीबपुर गोशाला की नहीं बन सकी बाउंड्रीवाल
कुंदरकी ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत चकहबीबपुर के रकबे संचालित गोशाला में 25 गोवंश के संरक्षण के लिए समुचित व्यवस्थाएं नहीं हैं। यहां पर पशुओं के लिए भूसा भी खुले में पड़ा रहता है। वहीं करीब तीन साल बाद भी गोशाला की बाउंड्रीवाल भी नहीं बन सकी है केवल तारबंदी कर छोड़ दिया गया है। पूर्व में गोशाला से कई गोवंशीय पशु चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गोशाला के केयरटेकर विपिन कुमार ने बताया कि गोशाला में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था है और हरा चारा चारागाह की भूमि से आता है। वहीं ग्राम प्रधान अरविंद चौधरी का कहना है कि बजट के अभाव के कारण गोशाला की बाउंड्रीवाल, भूसा स्टोर और एक और टीनशेड नहीं बन पा रहा है। मैनाठेर गांव में संचालित गोशाला में इस समय मात्र तीन गोवंश हैं जिनके लिए सभी तरह की व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
कांठ में बीमार गोवंश ने तोड़ा दम
कांठ तहसील के उमरी कलां में नगर पंचायत द्वारा कान्हा और गांव सादकपुर मूलकपुर उर्फ खिचड़ी ग्राम पंचायत के माध्यम से वृहद गो-संरक्षण केंद्र का संचालन किया जा रहा है। दोनों स्थानों पर वर्तमान में 416 गोवंश हैं। शुक्रवार को क्षेत्र के उमरी कलां और सादकपुर मूलकपुर खिचड़ी गोशालाओं में शुक्रवार को नौ पशु बीमार मिले। इनमें से उमरी कलां में एक पशु ने शुक्रवार सुबह दम तोड़ दिया, उसे अफरा रोग से था। अन्य एक पशु का उपचार चल रहा है। वहीं सादकपुर गोशाला में सात पशु बीमार हैं, जो बुखार और अफरा रोग से पीड़ित हैं जिनका उपचार पशु चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा किया जा रहा है।
वहीं उमरी कलां की गोशाला में सीसीटीवी कैमरे और उनका पूरा सिस्टम खराब मिला। इसके अलावा सादकपुर खिचड़ी गोशाला में पशुओं की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल ही नहीं है। यहां लोहे की जाली लगाकर बैरिकेडिंग की हुई है। वह जगह-जगह से टूट चुकी है। पिछलेे दिनों टूटी जाली में गर्दन फंसने से एक गाय की मौत भी हो गई थी। दोनों जगह पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा, हरा चारा, पानी, चोकर, नमक मिला। प्रशासन की भूमि पर ही चारा उगाकर गोवंश को दिया जा रहा है।
ठाकुरद्वारा स्थित गोशाला में मिलीं अव्यवस्थाएं
एसडीएम कोर्ट रोड स्थित गोशाला में 19 गोवंश हैं। समाजसेवी तुषार अग्रवाल और नागेंद्र शिव कुमार ने बताया कि पशुओं के हरे चारे के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है। बाजार से प्रतिदिन खरीदकर पशुओं के लिए भूसा और हरा चारा लाया जाता है। गोवंश के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी नगरपालिका के ओवरहेड से आपूर्ति होती है। यहां एक भी पशु दूध नहीं दे रहा है तो इनकम भी नहीं है। पशुओं का उपचार नगर के पशु चिकित्सालय से चिकित्सकों को बुलाकर कराया जाता है।
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