मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा के गांव लालापुर पीपलसाना में तेंदुए ने खेत पर काम कर रहीं संतोष देवी की जान ले ली। शरीर के कई हिस्सों को खा लिया था। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि यदि कोई तेंदुआ इंसान का शिकार कर उसे भोजन के रूप में स्वीकार कर ले, तो उसके दोबारा हमला करने का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में वन विभाग विशेष सतर्कता बरतता है और संबंधित तेंदुए की पहचान कर उसे पकड़ने का अभियान चलाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में तेंदुआ इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है। अधिकांश हमले अचानक आमना-सामना होने, घिर जाने, शावकों की रक्षा करने या बच निकलने की कोशिश में होते हैं। लेकिन यदि किसी तेंदुए ने इंसान को मारकर उसका मांस खा लिया, तो वह इंसान को अपेक्षाकृत आसान शिकार के रूप में पहचान सकता है। ऐसी स्थिति में उसके उसी क्षेत्र में फिर से हमला करने की आशंका बढ़ जाती है।
वन विभाग की मानव-तेंदुआ संघर्ष प्रबंधन गाइडलाइन के अनुसार ऐसे तेंदुए को सामान्य वन्यजीव नहीं माना जाता। उसकी पहचान कर पिंजरे, कैमरा ट्रैप और विशेष निगरानी के जरिए पकड़ना प्राथमिकता होती है। ऐसे मामलों में पकड़े गए तेंदुए को दोबारा जंगल में छोड़ने की बजाय नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है, क्योंकि उसके दोबारा मानव पर हमला करने का जोखिम बना रहता है।
डीएफओ डॉ. विनय कुमार का कहना है कि हर हमला आदमखोरी का मामला नहीं होता। कई घटनाएं अचानक आमना-सामना होने की वजह से होती हैं। इसलिए प्रत्येक घटना का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जाता है। कैमरा ट्रैप, पैरों के निशान, हमले के तरीके और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जाता है कि संबंधित तेंदुए का हमला केवल रक्षात्मक था या उसने इंसान को शिकार बनाया। इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जाती है।
इस तरह शिकार करता है तेंदुआ
वन विभाग के मुताबिक तेंदुआ बेहद धैर्यवान और घात लगाकर हमला करने वाला शिकारी माना जाता है। वह पहले झाड़ियों, गन्ने के खेत या ऊंची घास में छिपकर शिकार की गतिविधि पर नजर रखता है। मौका मिलते ही पीछे या बगल से तेज छलांग लगाकर गर्दन या गले पर पकड़ बनाता है।
कुछ ही सेकंड में शिकार को गिराकर उसका दम घोंट देता है। वह गर्दन के भीतर तक दांत गढ़ा देता है जिससे व्यक्ति की जगुलर वींस और कैरोटिड आर्टिरिक्स टूट जाती है। श्वसन नली खत्म हो जाती है और व्यक्ति की मौत हो जाती है। इसके बाद वह शिकार की खोपड़ी में पंजे धंसा कर गहरे जख्म बना देता है। इसके बाद वह शिकार को घसीटकर सुरक्षित स्थान पर ले जाता है, ताकि बिना किसी व्यवधान के भोजन कर सके।
नब्बे पिंजरे लगे...तेंदुए घूम रहे आजाद
मुरादाबाद मंडल में तेंदुओं का आतंक बढ़ता जा रहा है। सोमवार को ठाकुरद्वारा में खेत पर काम कर रही एक महिला की जान तेंदुए ने ले ली थी जबकि बुधवार को बिजनौर में नगीना के गांव सिंगनी में आठ साल के बच्चे को मार डाला। तेंदुओं के बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग प्रभावित इलाकों में पिंजरे भी लगा रहा है। 90 पिंजरे इस समय लगे हुए हैं लेकिन तेंदुए फिर भी आजाद घूम रहे हैं। सबसे ज्यादा 49 पिंजरे तो बिजनौर जिले में ही लगे हैं। जबकि रामपुर में 19 और मुरादाबाद में 23 पिंजरे लगाए गए हैं।
अगर मुरादाबाद की बात की जाए ठाकुरद्वारा, कांठ, डिलारी और भोजपुर क्षेत्र में पिंजरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। अकेले ठाकुरद्वारा में अब सात की जगह 10 पिंजरे लगाए जा चुके हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुओं को पकड़ना आसान नहीं है। गन्ने के कई किलोमीटर तक फैले खेत, रामगंगा और कोसी नदी का किनारा, झाड़ियां और खेतों के बीच बने प्राकृतिक रास्ते उन्हें लगातार सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करा रहे हैं।
एक स्थान पर हलचल होने पर तेंदुआ रातोंरात कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव पहुंच जाता है। यही कारण है कि पिंजरों में बकरी बांधने और ड्रोन से निगरानी के बावजूद सफलता नहीं मिल रही। ठाकुरद्वारा क्षेत्र के लालापुर पीपलसाना, राई भूड़, चंदूपुरा, पानूवाला, गोपीवाला, कालेवाला, मलकपुर सेमली, नारायणपुर छंगा, मधुपुरी, शेरपुर पट्टी और आसपास के गांवों में वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। कई स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जबकि ड्रोन से भी निगरानी कराई जा रही है।
तेंदुए के पैरों के निशान मिलने पर आसपास के गांवों में मुनादी कर लोगों को खेतों में अकेले न जाने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग ने प्रभावित गांवों में रेस्क्यू टीमों की संख्या भी बढ़ाई है। बिजनौर, मुरादाबाद और रामपुर की टीमें जरूरत पड़ने पर संयुक्त अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधि मिलती है, वहां तत्काल पिंजरा लगाने के साथ निगरानी शुरू कर दी जाती है। जरूरत पड़ने पर दूसरे जिलों से भी पिंजरे मंगाए जा रहे हैं।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ते हमलों के बीच केवल पिंजरे लगाना पर्याप्त नहीं है। तेंदुए कई बार पिंजरों के आसपास तक आते हैं, लेकिन उनमें फंसते नहीं हैं। इससे गांवों में रात के समय लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। किसान भी समूह बनाकर खेतों में जाने को मजबूर हैं।
इन गांवों में लगे हैं पिंजरे
मुरादाबाद के गोपालपुर-बहादरपुर, दरियापुर रोड, खलीलपुर कद्दीम, चेतरामपुर रोड, सलेमपुर, मल्लीवाला, राई भूड़, मधुपुरी, नारायणपुर छंगा, पानूवाला, आलमगीरपुर, मलकपुर सेमली, चंदूपुरा, गोपीवाला, कालेवाला, पाड़ला, लालापुर पीपलसाना, फरीदनगर, बैंतखेड़ी, रामनगर खागूवाला, मुढ़ा मोहम्मदपुर, ढकिया जट, टांडा अफजल, रतनपुर कलां, रतनपुर खुर्द समेत 45 गांव। रामपुर में स्वार, मिलक, शाहबाद, टांडा, कैमरी, बिलासपुर, सैफनी समेत 12 गांव। अमरोहा में हसनपुर, नौगावां सादात, बछरायूं, धनौरा, रहरा, अलीपुर कलां, पतेई भूड़ समेत 10 गांव। संभल के गुन्नौर, जुनावई, रजपुरा, बहजोई, असमोली समेत 10 गांव और बिजनौर के अमानगढ़, धामपुर, नहटौर, बढ़ापुर, मंडावर, किरतपुर, हल्दौर, अफजलगढ़, रेहड़, शेरकोट, मुस्सेपुर, मुकर्रमपुर, टीप, भागूवाला समेत 40 से ज्यादा गांवों में तेंदुओं की दहशत है। इनमें से कई गांवों में वन विभाग ने लोगों को अलर्ट किया है।
चूंकि तेंदुए क्षेत्राधिकार के मामले में आपस में लड़ जाते हैं इसलिए यदि आसपास तेंदुआ पकड़ा जाता है तो यह तय माना जाएगा कि यह वही तेंदुआ है जिसने महिला पर हमला किया। मंडल के गावों में करीब 90 पिंजरे लगे हैं। हमारे पास ट्रैंक्यूलाइजर गन भी हैं लेकिन उनका इस्तेमाल तब किया जाता है जब वन्य जीव कहीं फंस जाए और उसका रेस्क्यू करना हो।- आदर्श कुमार, मंडलीय वन संरक्षक