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Moradabad News: नौ स्कूलों में शिक्षक नहींं, 42 में केवल एक

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मुरादाबाद। शैक्षिक सत्र आधे से ज्यादा बीत चुका है और परिषदीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे बस दावे ही बने हुए है। जनपद के नौ स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं, जबकि 42 ऐसे विद्यालय हैं जो एक शिक्षक के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर क्या होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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मुरादाबाद जनपद में 1408 परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.40 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें 51 ऐसे विद्यालय हैं जो एकल या शिक्षक विहीन हैं। इन विद्यालयों को संचालित करने के लिए अभी तक दूसरे विद्यालय के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती रही है। अब शासन ने निर्देश दिया है कि शिक्षक विहीन एवं एकल विद्यालयों में कम से कम दो शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इसके तहत बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार ने 26 दिसंबर को सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को शिक्षक विहीन और सरप्लस विद्यालयों की सूची जारी की थी। इस सूची के परीक्षण के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों को सत्यापित सूची सोमवार तक विभाग में जमा करनी थी।
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150 से कम छात्र संख्या पर प्रधानाध्यापक सरप्लस
विभागीय अधिकारियों के अनुसार शिक्षा का अधिकार (आरईटी) के अनुसार प्राइमरी विद्यालयों में यदि 150 से कम छात्र संख्या होती है तो वहां पर प्रधानाध्यापक पद नहीं माना जाता है। ऐसे में जो शिक्षक प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं, वह सरप्लस हो गए हैं। इस तरह जिले में करीब 350 विद्यालयों में सरप्लस प्रधानाध्यापक हैं।

बिलारी में सबसे अधिक एकल स्कूल
जिले में सबसे अधिक एकल स्कूल बिलारी में 16 हैं। इसमें एक विद्यालय शिक्षक विहीन है। मुरादाबाद शहर में 13 विद्यालयों में आठ विद्यालय शिक्षक विहीन हैं और पांच विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे संचालित किए जा रहे हैं। इसी तरह भगतपुर टांडा में आठ, छजलैट में एक, कुंदरकी में दो, डिलारी में चार, मूंढापांडे में तीन, ठाकुरद्वारा में चार स्कूल एक शिक्षक के सहारे हैं।

आज बीएसए को देंगे ज्ञापन
उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष नीरज शर्मा का कहना है कि पिछले छह महीने में तीसरी बार समायोजन हो रहा है। इसके बावजूद 51 विद्यालय शिक्षक विहीन और एकल हैं। हालांकि यह विद्यालय एकल और शिक्षक विहीन विभाग की पॉलिसी की वजह से ही हुए हैं। पिछले दिनों स्थानांतरण हुए थे। ऐसे में विभाग की ओर से उन स्कूलों से भी स्थानांतरण कर दिए गए, जहां नहीं होने चाहिए। अब इन 51 विद्यालयों के सापेक्ष लगभग 550 शिक्षकों को सरप्लस बताकर सूची निकाली है। हमारी मांग है कि प्राइमरी स्कूलों में पांच और जूनियर स्कूलों में तीन शिक्षक होने चाहिए। जबकि इस सूची में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां तीन या चार ही शिक्षक हैं, फिर भी वहां सरप्लस शिक्षक दिखाए हैं। इसके विरोध में मंगलवार को बीएसए को ज्ञापन देंगे।
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