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अवैध खनन पर एनजीटी ने ठोका नौ करोड़ रुपये जुर्माना

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रामपुर। कोसी नदी में मशीनों से अवैध खनन कराने के मामले में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने नौ करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। पंद्रह दिनों के भीतर यह जुर्माना पट्टा धारक नीरज चतुर्वेदी को जमा करना होगा।
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पूर्व मंत्री हाजी निसार हुसैन के पुत्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता मुस्तफा हुसैन ने 2017 में जिला प्रशासन से रामपुर में हो रहे अवैध खनन को रोकने की मांग की थी, लेकिन अफसरों की मिलीभगत के चलते पट्टों पर अवैध खनन जारी रहा। यही नहीं खनन करने वालों को जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की अनुमति दे दी। वह भी नियम विरूद्ध। ऐसे में प्रशासन की लापरवाही की वजह से तीन लोगों की मृत्यु भी हो गई थी। तमाम शिकायतों के बाद भी जिला प्रशासन से न्याय नहीं मिला तो सामाजिक कार्यकर्ता मुस्तफा हुसैन ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, नई दिल्ली में अवैध खनन करने वालों के खिलाफ याचिका दायर की दी। इसमें भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार के खनिज विभाग, जिलाधिकारी रामपुर सहित कई लोगों को पार्टी बनाया।
एनजीटी ने आदेशित कर पर्यावरण मंत्रालय के वैज्ञानिक डॉ. सत्या और दिनेश चंद्र झकवाल के नेतृत्व में जांच दल को स्वार के पट्टी कलां व चौहद्दा क्षेत्र में गाटा संख्या 577 व 1126 और 1127 हुए अवैध खनन की जांच करने के लिए भेजा। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि क्षेत्र में भारी मात्रा में मशीनों से अवैध खनन हुआ। भारतीय पर्यावरण मंत्रालय ने16 मार्च 2018 को अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की। इसमें पाया गया कि क्षेत्र में अवैध खनन हुआ था। प्रशासन द्वारा जिन स्थानों को खनन के लिए पट्टा दिया गया, उस निर्धारित क्षेत्र पर कोई बाउंड्री निशान नहीं था। जांच के समय हैवी मशीनें भी पाई गईं। नदियों में बड़े -बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे थे, जिससे लगा कि हैवी मशीनों का प्रयोग हुआ है। नदी में डंपरों के रास्ते बने हुए थे। नदी क्षेत्र में ही एक चाय की दुकान थी, जिससे पूछा गया तो उसने भी बताया कि यहां पर डंपरों की काउंटिंग होती है। नदी क्षेत्र के पास में दो स्टोन क्रेशर भी पाए गए।
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27 सितंबर को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के जज रघुवेंद्र सिंह राठौर और डॉक्टर सत्यभान सिंह गर्ब्याल ने निर्णय सुनाया। उन्होंने आदेश दिया कि स्वार क्षेत्र के पट्टी कलां में भारी मात्रा में अवैध खनन हुआ है। इसलिए, गाटा संख्या 577 का 1,10,52,832 रुपये व गाटा संख्या 1126-1127 का 7,96,66,125 रूपये यानी कुल 9,16,61,677 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति पट्टा धारक नीरज चतुर्वेदी 15 दिन में जमा करना होगा।
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