मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज की ओर से आयोजित दो दिवसीय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कान्क्लेव का सोमवार को समापन किया गया। सेमिनार में पाठ्यक्रम एवं शैक्षिक सुझावों के विश्लेषण के साथ देश के शैक्षिक ढांचे में विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज में नीति क्रियान्वयन की भूमिका पर भी चर्चा हुई। माध्यमिक और उच्च शिक्षा में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का योगदान और आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अपना नजरिया प्रस्तुत किया।
विल्सोनिया स्कॉलर्स होम की प्रधानाचार्या श्वेतांगना संतराम ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा। उनमें रचनात्मकता आएगी। शिक्षा हमें बेहतर मानव के साथ-साथ अच्छा नागरिक भी बनाती है। 2.25 लाख से ज्यादा लोगों के सुझावों के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया गया है। शिक्षाविदें और अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से हम बहुभाषी शिक्षण की ओर बढ़ेंगे, ताकि वैश्विक चुनौतियों का सहज सामना कर सकें। समापन समारोह में टीएमयू की शैक्षणिक उपलब्धियों के परिसर, क्रिकेट स्टेडियम, वातानुकुलित ऑडी व अन्य संसाधनों की प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी। इस मौके पर हिमांशु सिंह और श्रुति जैन, अर्शिया, डॉ. सोनिया जयंत, डॉ. पराग अग्रवाल, राघवेंद्र प्रताप सिंह, नेहा आनंद, अंकित शर्मा आदि मौजूद रहे।
परिणाम आधारित शिक्षा के संग सीखने के लिए रहें प्रयासरत : अक्षत जैन
मुख्य अतिथि एस्टीम्ड मेंबर ऑफ टीएमयू सोसाइटी अक्षत जैन ने कहा कि नई शिक्षा नीति न केवल युवाओं को रचनात्मक बनाने के साथ कौशल युक्त सोच को भी विकसित करेगी। परिणाम आधारित शिक्षा के संग सीखने के लिए प्रयासरत रहना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नीति साक्षरता और शिक्षा के अंतर को कम करेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों को देनी होंगी सुविधाएं : कनिका अग्रवाल
व्हाइट हॉल सीनियर सेकेंड्री स्कूल की शिक्षिका कनिका अग्रवाल ने बताया कि भारतीय शिक्षा पद्धति में इससे आमूलचूल परिवर्तन आएगा। सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षण और संसाधनों की है। नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना बहुत जरूरी है। इसके अलावा सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों को सुविधाएं देनी होंगी।
बदलाव को सफल करने के लिए लेना होगा प्रशिक्षण : एसके नैथन
पारकर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य एसके नेथन ने कहा कि समय बहुत तेजी से परिवर्तित हो रहा है। 40 साल पुरानी शिक्षा नीति से युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन मिले यह संभव नहीं है। आज से 50 साल पहले जरूरतें अलग थीं, अब दूसरी आवश्यकताएं हैं। नए-नए प्रशिक्षण भी लेने होंगे, ताकि बदलाव के क्रियान्वयन में हमें सफलता मिल सके।
शौक से संवरेगा विद्यार्थियों का भविष्य : डॉ. स्वाति शर्मा
स्प्रिंगफील्ड्स कालेज की प्रधानाचार्य डॉ. स्वाति शर्मा ने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में रचनात्मकता और कौशलयुक्त शिक्षा पर जोर दिया गया है। पुराने पाठ्यक्रम में कौशल की कमी महसूस की जा रही थी। अभी तक हमें इंजीनियर और चिकित्सक बनने के लिए जरूरी शिक्षा को पढ़ने की बाध्यता थी। नई शिक्षा नीति में हम अपने शौक के माध्यम से भविष्य को साकार कर सकेंगे।