वहीं नया निवेश पूरी तरह से थम गया है। अभी जिन लोगों का निवेश बाजार में है वे घाटा उठा रहे हैं। बाहर निकलने चाहते हैं, लेकिन निकलने के लिए आने वाले दिनों में सरकार के नए आदेश का इंतजार है। जिसके चलते निवेशकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
मुरादाबाद शेयर बाजार का बड़ा निवेशक है। यहां से शेयर बाजार, एमसीएक्स में सैकड़ाें करोड़ रुपये का निवेश है। मुरादाबाद के अधिकांश निर्यातकों का निवेश धातुओं में होता है। लेकिन इस समय जिस प्रकार से नोट बंदी के बाद से चारों ओर हाहाकार मच हुआ है। उससे निवेशकों को भी झटका लगा है। बाजार डाउन है तो निवेश पर ब्रेक है। वहीं जिन लोगों का पैसा लगा हुआ है वे निकालने को तैयार नहीं हैं। सभी के सामने एक ही विकल्प है कि वेट एंड वॉच। नोट बंदी के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि इनवेस्टमेंट सेक्टर में पैसा बढ़ेगा, लेकिन कैश के फ्लो और बैंक खातों से ट्रांसफर की प्रक्रिया में भी मुश्किल हैं। जिसके चलते निवेश मार्र्केट भी बिल्कुल ठंडा है। अभी इसके एक महीने तक और ठंडा रहने की उम्मीद है। शेयर बाजार विशेषज्ञ खालिद खान ने बताया कि अभी लोग शांत बैठे हुए हैं। शुक्रवार को बाजार में कुछ सुधार हुआ है।
इस समय स्थिति बन रही है उससे बाजार में रुपये का फ्लो रुक गया है। नोटबंदी के बाद उम्मीद जगी थी कि निवेश बढ़ेगा, लेकिन हो उल्टा रहा है। लोग नोट बदलने में लग गए और निवेश करना भूल गए। इसका प्रभाव हर सेक्टर पर पड़ रहा है। बाजार से जल्द सरकार ने रुपये का फ्लो जल्द न हुआ तो परिणाम निवेशकों को नुकसान होगा और वे इससे दूर रहेंगे। निवेश नहीं आने से सभी सेक्टर की ग्रोथ रेट गिरेगी।
रोजगार के अवसर में आएगी गिरावट
मुरादाबाद। इस समय जिस प्रकार से बाजार में रुपये का चक्का घूमना बंद हो गया है। उसके दुष्परिणाम मंदी के रूप में दिखाई देंगे। लेकिन आर्थिक जानकारों का मानना है कि सरकार ने इसके लिए तैयारी की होगी। लेकिन नोट बंदी जैसे फैसले की तरह ही दूरगामी योजना नहीं बनाई होगी तो इसका प्रभाव यूथ पर ज्यादा होेगा। रोजगार के अवसर में गिरावट आएगी।