कंप्यूटर की दुनिया हर रोज बदलती है। कंप्यूटर में दर्ज आंकड़ों और निजी दस्तावेजों को सुरक्षित बनाने के लिए विशेषज्ञ दिनरात लगे रहते हैं। दिन-रात खुद को खपाकर नई तकनीकी ईजाद करते हैं। लेकिन कंप्यूटर का सुरक्षाचक्र भेदने वाले उन्हें तोड़ देते हैं।
कंप्यूटर सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मुरादाबाद के छात्र आकाश वत्सल ने सफलता हासिल की है। उनकी खोज को माइक्रोसाफ्ट ने टेस्ट करके देखा और सफल होने पर उसे विंडो के नए वर्जन में शामिल किया है। इसके साथ ही वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया वालंटियर भी हैं और विभिन्न कालेजों में जाकर डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को साकार बनाने में जुटे हैं।
मुरादाबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर साइंस के लास्ट सेमेस्टर के छात्र आकाश की जिंदगी सिर्फ कंप्यूटर के ही इर्द-गिर्द घूमती है। वह ‘एथिकल हैकिंग’ में भी महारत रखते हैं। कंप्यूटर सिक्योरिटी सिस्टम तोड़ना उनके बाएं हाथ का खेल है। इसी से उसकी सिक्योरिटी सिस्टम बनाने का आइडिया भी आया।
उन्होंने कंप्यूटर सुरक्षा के लिए डिजिटल सिग्नेचर की कोडिंग डिजाइन की। इसे माइक्रोसाफ्ट को भेजा। कंपनी ने उनकी डिजाइन पर काम किया और उसे सुरक्षित मानते हुए विंडो के नए वर्जन में एड किया है। आकाश मूल रूप से काशीपुर के रहने वाले हैं।
कई चरण का टेस्ट पास कर जुडे ‘डिजिटल इंडिया’ से
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया के वे वालंटियर भी हैं। कई टेस्ट पास करके वाह वालंटियर बने। अब वह इस कैंपेन का हिस्सा हैं। अभी वह कुमायूं रीजन के कालेज और विश्वविद्यालयों में डिजिटल इंडिया पर लेक्चर ले रहे हैं। आकाश ने बताया कि डिजिटल इंडिया का लोग मतलब तक नहीं समझ पा रहे हैं।
कंप्यूटर और मोबाइल पर इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन उसके प्रयोग के साथ ही सिक्योरिटी को लेकर लापरवाह है। जिसका फायदा दूसरे देश के दुश्मन करते हैं। वे कंप्यूटर और मोबाइल को हैक करके देश का माहौल खराब करते हैं। लेकिन उनका उद्देश्य लोगों को सुरक्षा के मुद्दे पर जागरूक करना है।
हैकर्स के प्रति बदलनी है सोच
आकाश का कहना है कि हैकर्स को आज भी बुरी नजर से देखा जाता है। लेकिन हैकर केवल गलत काम नहीं करते। विश्वभर में जितने भी डिजिटल सिक्योरिटी सिस्टम तैयार हुए हैं वे हैकर्स की देन है जिन्हें एथिकल हैकर कहा जाता है। आज हैकर्स सरकार के लिए भी काम कर रहे हैं।
माइक्रोसाफ्ट ने दिया 58 लाख का पैकेज
आकाश की डिजाइन को अपने नए वर्जन में जोड़ने के बाद कंपनी ने उन्हें अपने साथ जोड़ भी लिया है। बिना कोई परीक्षा और इंटरव्यू दिए ही वे विश्व की नंबर वन कंपनी के इंप्लाई बन गए हैं। माइक्रोसाफ्ट ने उन्हें 58 लाख रुपये सालाना का पैकेज दिया है।