कुंदरकी। आठवीं मुहर्रम को हजरत अब्बास अलमदार की शहादत के गम में शिया समुदाय में अलम मुबारक, शबीहे ताबूत और जुलजिनाह का मातमी जुलूस निकला। वहीं सुन्नी समुदाय ने देर रात नगर में बड़ी मेहंदी का जुलूस या हुसैन की सदाओं के साथ निकाला गया।
बुधवार की सुबह कुंदरकी के मोहल्ला सादात में महबूब रिजवी के अजाखाने पर हजरत अब्बास अलमदार की शहादत के गम में मजलिस हुई। जिसमें कमर अब्बास काजमी ने मरसिया पढ़ा और मजलिस को खिताब करते हुए काशिफ अब्बास काजमी ने कहा कि कर्बला हमें इंसानियत और सब्र करने का पैगाम देती है। कर्बला में हजरत इमाम हुसैन ने जालिम के खिलाफ आवाज बुलंद करके दुनिया को पैगाम दिया कि जुल्म के खिलाफ सिर झुकाने से अच्छा है सिर कटाना। उन्होंने कहा कि इस्लाम अमन शांति का पैगाम देता है इसलिए आतंकवाद और दहशतगर्द इस्लाम के अनुयायी नहीं हो सकते हैं।
मजलिस में हजरत अब्बास अलमदार की शहादत का बयान सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं। अलम मुबारक, शबीहे ताबूत व जुल्ज़िनाह का कदीमी मातमी जुलूस निकला। जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने हाथों में कुजे लेकर अल्लाह तश, हाय प्यास, हाय सकीना की सदाएं बुलंद कीं तो माहौल गमगीन हो गया। फिजा में या अब्बास या अब्बास की सदाएं बुलंद होने लगीं। जुलूस में अंजुमन अकबरी, अंजुमन शाने हैदरी, अंजुमन अल मुर्तजा ने नोहाख्वानी की। जुलूस नूर हसन मेहंदी के अजाखाने में पहुंच कर समाप्त हुआ। वहीं बुधवार की देर रात नगर के मोहल्ला सादात पूर्वी स्थित अहले सुन्नत बल जमात के पंचायती इमामबाड़े में शहादत नामे की महफिल हुई जिसमें हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी पर रोशनी डाली गई। महफिल के बाद सुन्नी समुदाय ने बड़ी मेहंदी का जुलूस निकला। जुलूस में ताजिये और डोल शामिल रहे। जुलूस पूरी रात गश्त करने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह जामा मस्जिद पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
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हरियाना में अकीदत के साथ निकाला अलमों का जुलूस
कुंदरकी। सुन्नी समुदाय ने कुंदरकी ब्लॉक के ग्राम हरियाना में बुधवार की शाम जरीफ अहमद के मकान के पास से अलमों को जुलूस शुरू हुआ, यह निर्धारित रास्तों से होते हुए अंसारियों वाले इमामबाड़े पर पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान सुन्नी अजादार शहादत नामे पढ़ते और या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे। जुलूस के दौरान ग्राम पंचायत प्रशासक गुलशन मोहम्मद, पूर्व प्रधान अफसर अल, सामाजिक कार्यकर्ता शरीफ हुसैन, मकसूद चौधरी, जावेद मुगल, अबरार खां, हाफिज माजिद जुबैर आलम, अरमान रजा, खुर्शीद खान, फिरोज खान, अली हुसैन, खालिद डीलर, मोहम्मद यामीन, रईस अहमद, शाद खान, राशिद सैफी, मोमीन सैफी व जीशान खान आदि अकीदतमंद मौजूद रहे।
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इमाम ए हुसैन ने जंग के मैदान में भी नहींं छोड़ी नमाज : मिस्बाही
कुंदरकी। मोहल्ला नूरूल्ला स्थित मस्जिद सिद्दीक ए अकबर में आयोजित दस रोजा पैगाम ए कर्बला कॉन्फ्रेंस की आठवीं शब में वाकया ए कर्बला सुनाया गया। कॉन्फ्रेंस में मुफ्ती मुजफ्फर हुसैन मिस्बाही ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम की खातिर सबकुछ लुटा दिया लेकिन बातिल के आगे सिर नहीं झुकाया नेजे पे सिर चढ़ा तो चढ़ा वाह रे हुसैन तुमने बुलंद परचम ए इस्लाम कर दिया। इमाम ए हुसैन ने जंग के मैदान में भी नमाज नहीं छोड़ी और सजदे की हालत सिर कटा दिया, हमें इमाम हुसैन की सीरत पर अमल करते हुए नमाज की पाबंदी करनी चाहिए। काॅन्फ्रेंस की सदारत पीरे तरीकत अनीसुर्रमान अजहरी ने की। मौके पर मौलाना गय्यूर अहमद आफाकी, मुफ्ती सुब्हान रजा, अबरार हुसैन अत्तारी, हाफिज फैजान, इन्तजार रजवी, इरफान खान व बिलाल रजा आदि मौजूद रहे।
फोटो संख्या एक, दो और तीन भेजे गए हैं।
फोटो संख्या छह औ सात भेजे गए हैं।