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Moradabad News: सेवानिवृत्त के बाद बैक डेट में निपटा दीं मोटर दुर्घटना दावे की फाइलें

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मुरादाबाद।
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मुरादाबाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में पीठासीन अधिकारी रहे शिवनंदन सिंह ने सेवानिवृत्त होने के बाद भी बैक डेट में फाइलें पर निर्णय लिया है। जिससे बीमा कंपनियों को लाखों रुपये का चूना लग गया। कार्यालय से फाइलें आवास पर भेजी गईं और वहीं उन पर आदेश भी दिए गए हैं। शासन के आदेश पर की गई जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। हालांकि पुलिस ने मामला न्याय विभाग से जुड़ा होने के कारण बीच में ही हाथ खड़ा कर लिए थे।
मूलरूप से मिर्जापुर निवासी शिवनंद सिंह दिसंबर 2022 में ट्रांसफर होकर मुरादाबाद में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के पद पर तैनात हुए थे। इससे पहले भी वह मुरादाबाद में तैनात रह चुके हैं। न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय समेत कई अधिवक्ताओं ने शासन में शिवनंद सिंह के खिलाफ शिकायतें भेजी थीं। जिसमें उन्होंने बताया कि 30 मार्च 2024 को शिवनंदन सिंह सेवानिवृत्त हो गए थे। उस दिन भी शाम पांच बजे के बाद कई फाइलों पर निर्णय लिया गया है। इसके अलावा वह तमाम फाइलें उठाकर अपने घर ले गए। 12 अप्रैल 2024 तक फाइलों पर निर्णय लिया गया है। जिन फाइलों पर निर्णय लिए हैं। उन पर कंपनी के अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर नहीं कराए गए हैं। सेवानिवृत्त जज पर यह भी आरोप लगाए गए कि उन्होंने अपने आवास पर निजी कंप्यूटर ऑपरेटर से टाइपिंग कराई। वह दो साल तक मुरादाबाद में तैनात रहे, लेकिन उन्होंने 90 प्रतिशत फाइलों पर सेवानिवृत्त होने के वाले माह में लिया है।
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पुलिस के हाथ खड़े किए तो शासन ने हाईकोर्ट में कार्रवाई की मांग
मुरादाबाद। अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय समेत अन्य अधिवक्ताओं ने शासन को पत्र भेजकर सेवानिवृत्त जज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शासन ने इस मामले में मुरादाबाद के डीएम को पत्र भेजकर जांच कराने के आदेश दिए थे। डीएम ने एसएसपी को पत्र भेज कर पूरे प्रकरण में जांच करने के निर्देश दिए। इस मामले में सीओ के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई। आरोप लगाने वाले अधिवक्ताओं के बयान दर्ज कराए। इसके बाद सामने आया है कि न्यायिक अधिकारी रहे शिवनंदन पर पैसे लेकर फाइलों का निस्तारण किया गया। इसका कुछ लोगों को फायदा पहुंचा गया है। इसके बाद पुलिस ने यह कहते हुए अपनी जांच बंद कर रही कि यह मामला न्यायिक अधिकारी से जुड़ा है। इस मामले की जांच पुलिस विभाग द्वारा किया जाना संभव नहीं है। इस मामले की जांच न्यायिक विभाग से कराई जाए। इसके बाद शासन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई।


सीजेएम और एडीजे भी रहे चुके हैं शिवनंदन सिंह
करीब दो साल तक मुरादाबाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में पीठासीन अधिकारी रहे शिवनंदन सिंह की इससे पहले भी मुरादाबाद में तैनाती रह चुकी है। 17 मार्च 2013 से 22 अगस्त 2013 तक मुरादाबाद सीजेएम के पद पर तैनात रहे हैं। इसके बाद शिवनंदन सिंह पदोन्नत होकर इटावा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बन गए थे। दो सितंबर 2013 में दोबारा मुरादाबाद में एडीजे के पद पर ट्रांसफर हो शिव नंदन सिंह आ गए थे। सात मई 2016 तक वह मुरादाबाद में तैनात रहे। इसके बाद इनका ट्रांसफर गोरखपुर में स्पेशल एंटी करप्शन न्यायाधीश कोर्ट में हो गया था। तीसरी बार शिवनंदन सिंह को मुरादाबाद में तीन दिसंबर 2022 को मुरादाबाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में पीठासीन अधिकारी पद पर तैनाती मिली। 30 मार्च 2024 को वह सेवानिवृत्त हुए हैं।
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शासन ने 11 मामलों में हाईकोर्ट से जांच कराने की मांग की
उत्तर प्रदेश के अलग अलग जनपदों से 11 मामलों में शासन ने जनपद स्तर पर जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामलों की गंभीरता को देखते हुए शासन ने हाईकोर्ट से जांच कराने की मांग रखी है। इसमें शिवनंदन सिंह के खिलाफ भी शिकायत हुइ थी।
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