सोनकपुर थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी मजदूर का 11 वर्षीय बेटा पड़ोसी गांव स्थित निजी स्कूल में कक्षा चार में पढ़ता था। बताया जा रहा है कि शनिवार दोपहर में गांव में एक व्यक्ति चूजे बेचने आया था। गांव के अन्य बच्चे चूजे खरीद रहे थे। तब मजदूर का बेटा ने भी मां से चूजे खरीदने के लिए 10 रुपये की मांग की थी।
मां ने कहा कि खुले पैसे नहीं है बल्कि पांच सौ रुपये का नोट है। जिद करने पर मां ने डांट दिया। इससे क्षुब्ध होकर छात्र ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और गले में रस्सी का फंदा डाल कर छत के कुंडे से लटक गया।
काफी देर बाद भी बच्चा बाहर नहीं निकला तो मां को कुछ शक हुआ। उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन छात्र ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद मां के शोर मचाने पर अन्य परिजन और आस पड़ोस के लोग भी आ गए। इसके बाद दरवाजा तोड़कर परिजन अंदर घुसे तो छात्र रस्सी के सहारे कुंडे से लटका हुआ था। परिजन उसे उतारकर निजी अस्पताल में ले गए, वहां पर डॉक्टर ने देखते ही छात्र को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव घर ले गए। वहां ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। कुछ देर बाद में परिजनों ने गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
दो बहनों का इकलौता भाई था छात्र
आत्महत्या करने वाला छात्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें भी हैं। वह पढ़ाई लिखाई में होनहार था। छात्र की मौत से उसके परिजन समेत सहपाठी भी दुखी हैं।
शनिवार को परीक्षा देकर लौटा छात्र, नहीं खाया था खाना
मौत के आगोश में जाने से पहले छात्र ने शनिवार को वार्षिक परीक्षा दी थी। स्कूल से आने तक घर में सब कुछ सामान्य माहौल था। चूजे खरीदने को लेकर उसका स्वभाव अचानक बदल गया। कुछ ही क्षणों में परिवार के लाडले ने गले में फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
चूजे के पालन का था शौक
मृतक छात्र चूजे पालने का शौकीन था। उसने चूजे को पालने के लिए पिंजरा बना रखा। जिनकी सुरक्षा को लिए रस्सी छत के कुंडे से बांध रखी थी। परिजनों ने बताया कि स्कूल से आकर पहले चूजों को ही दाना खिलाता था और उसके बाद पिंजरे को रस्सी से खींचकर ऊपर कर देता था जिससे चूजों तक बिल्ली न पहुंच सके। चूजों के पिंजरे की रस्सी से छात्र ने गले में फंदा लगाकर जान दी।