इसके आधार पर ही उन्हें भूटान में अपनी चमक बिखेरने का मौका मिला है। प्रतियोगिता पांच से नौ अक्तूबर तक आयोजित होगी। अमित सात अक्तूबर को भाला फेंकेंगे। उनके पिता चौधरी कुंवर पाल सिंह किसान हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में कोई और खेलों से प्रेरित नहीं है लेकिन बेटे ने बचपन से ही रुचि दिखाई। अमित ने बताया कि वह अपने एक मित्र के साथ हैमर थ्रो का अभ्यास करने गया था लेकिन उससे वह नहीं हुआ। इसके बाद शॉर्ट पुट में हाथ आजमाया लेकिन वहां भी असफल रहा। तब कोच ने भाला फेंकने की सलाह दी और अमति ने पहली बार में ही 45 मीटर भाला फेंका। इसके बाद प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में दो बार पदक जीत चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागिता के समय उन्होंने 72.25 मीटर भाला फेंका। इससे उनके कंधे में गंभीर चोट आ गई। इंजरी से उभरने के बाद उन्हें फिर मौका मिला है।