मुरादाबाद एयरपोर्ट तो फिलहाल चालू नहीं हो पाया है लेकिन वहां नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी शुरू हो गई है। इसका पता तब चला जब एयरपोर्ट के गेट पर लोग फर्जी ज्वाइनिंग लेटर लेकर पहुंचने लगे। किसी का कहना था कि हमें एयरपोर्ट के अंदर खुलने जा रहे मॉल के मैनेजमेंट के लिए रखा गया है।
20 दिन पहले एयरपोर्ट के गेट पर कुछ युवक पहुंचे थे। उनका कहना था कि उन्हें एयरपोर्ट में मॉल व दुकानों के मैनेजमेंट के लिए रखा गया है। उन्होंने तमाम दस्तावेजों का हवाला भी दिया लेकिन हवाई अड्डे पर इस तरह की कोई भर्ती नहीं निकाली गई थी। एयरपोर्ट की टीम ने युवाओं को समझाया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
चेक इन व अन्य व्यवस्थाएं बनाने के लिए नौकरी पक्की मानकर एक युवक हवाई अड्डे पर पहुंचा। उसने गेट पर बताया कि किसी एविएशन सर्विस से उसे मुरादाबाद हवाई अड्डे पर नियुक्ति दी है। जबकि एयरपोर्ट की टीम को इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
हवाई अड्डे पर अभी कोई नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। कई बार युवाओं को गेट से लौटाया गया है। सभी से अपील है कि किसी के बहकावे में न आएं। एयरपोर्ट पर नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले जिला प्रशासन या एएआई से इसकी पुष्टि कर लें। - संदीप कुमार, एयरपोर्ट डायरेक्टर।
हवाई अड्डे पर डीजीसीए के निरीक्षण के बाद बताए गए सभी बिंदुओं पर काम पूरा हो गया है। एएआई के अधिकारियों ने सभी दस्तावेज पूरे कर लिए हैं। सभी बिंदुओं पर काम खत्म करने के बाद डीजीसीए को पत्र भी भेज दिया गया है। अब इसी सप्ताह उड़ान के लिए लाइसेंस मिलने की उम्मीद है।
जानकारों का मानना है कि अक्तूबर में ही उद्घाटन की तिथि भी घोषित हो जाएगी। दिवाली से पहले मुरादाबाद से लोग हवाई सफर का आनंद ले सकेंगे। मुरादाबाद से शुरुआती उड़ान लखनऊ व कानपुर के लिए रहेगी।
फिलहाल सड़क मार्ग से लखनऊ जाने में सात घंटे और रेल मार्ग से लखनऊ जाने में साढ़े पांच घंटे लगते हैं। जबकि वायु मार्ग से यह सफर महज एक से डेढ़ घंटे का रह जाएगा। जबकि कानपुर की दूरी दो घंटे में तय हो सकेगी।
हालांकि किराये की सूची फिलहाल जारी नहीं हुई है लेकिन माना जा रहा है कि लगभग ट्रेन के किराये जितने रुपये खर्च कर उड़ान उपलब्ध हो सकेगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर का कहना है कि डीजीसीए को पत्र भेजकर सारी स्थिति से अवगत करा दिया गया है।