...कुछ कह नहीं सकता: जीएम
रेल मंत्रालय व रेलवे बोर्ड के इस निर्णय के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। खुर्जा में घटना हुई थी लेकिन आदेश ऊपर से ही हुए हैं। डीआरएम के बदलाव का क्या कारण रहा, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी मेरे पास नहीं है। - अशोक कुमार वर्मा, जीएम, उत्तर रेलवे
दो स्टेशन मास्टर निलंबित, कई रडार पर
डीआरएम पद से संग्रह मौर्य को हटाए जाने के बाद कुछ मंडलीय रेल अधिकारियों पर भी गाज गिरने के आसार हैं। सिग्नल या ऑपरेटिंग विभाग में से किसी एक पर घटना की जवाबदेही तय हो सकती है। हालांकि मामले की उच्चस्तरीय जांच जोनल मुख्यालय की टीम कर रही है।
खुर्जा के दो स्टेशन मास्टरों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। 29 दिसंबर की रात जब जीएम अशोक वर्मा मुरादाबाद में मौजूद थे। उसी समय खुर्जा में एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने होने का कंट्रोल रूम पर मैसेज आया था। जीएम फौरन कंट्रोल रूम पहुंचे।
पता चला कि दो ट्रेनें एक ही लाइन पर आमने-सामने थीं। ड्राइवर ब्रेक न लगाते तो बड़ा हादसा हो जाता। डीआरएम संग्रह मौर्य को मौके पर रवाना किया गया। साथ ही दो स्टेशन मास्टरों व टीआई को निलंबित कर दिया गया था।
यदि खुर्जा की घटना के कारण ही डीआरएम को हटाया गया है तो यह न्यायसंगत नहीं है। इससे आने वाले अधिकारी भी दबाव में कार्य करेंगे। कर्मचारियों से जुड़े मामले भी प्रभावित होंगे। - राजेश चौबे, मंडल मंत्री, नरमू
संग्रह मौर्य ने तीन माह कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान कराया। यदि वास्तव में खुर्जा की घटना इस कार्रवाई का कारण है तो यह तर्कसंगत नहीं है। -धर्मवीर सिंह, मंडल मंत्री, उरमू
तीन माह में ही हटे डीआरएम...पीछे कुछ तो है
बदलाव की जद में आए दोनों अफसरों की इसे लेकर चुप्पी है लेकिन पीछे कुछ गहरा है, यह हर कोई मान रहा है। मुरादाबाद रेलवे के इतिहास में यह पहला मौका है जब महज तीन माह में डीआरएम को हटा दिया गया। अधिकारियों, ट्रेड यूनियनों और रेलवे स्टाफ में चर्चा है कि खुर्जा में 29 दिसंबर को दो ट्रेनों की भिड़ंत की नौबत ही इस तबादले का कारण है।