खाली मिले रैन बसेरे
शनिवार को देर रात 12 बजे के बाद मुरादाबाद डिपो और पीतल नगरी डिपो पर बने अस्थायी रैन बसेरे में 50 प्रतिशत बेड खाली थे। जबकि रेलवे स्टेशन के पास बने स्थायी रैन बसेरे के पुरुष कक्ष में बेड फुल थे। महिला कक्ष में कई बेड खाली थे। यहां तहसीलदार धीरेश कुमार और उनकी टीम ने व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। उन्होंने बताया कि कई लोगों को सड़क से उठाकर रैन बसेरे में सुलाया गया है। कई लोग ऐसे भी हैं जो रैन बसेरे में आना ही नही चाहते।
मेरा घर पहले शहर में ही था, अब कोई ठिकाना नहीं है। दिन में रिक्शा चलाता हूं और रात में सड़क किनारे सो जाता हूं। रैन बसेरे में कोई सोने नहीं देता, कहां जाऊं। - अब्दुल हमीद
मैं दुकानों के बाहर सफाई का छोटा-मोटा काम करता हूं लेकिन मेरे पास आधार कार्ड नहीं है। इसलिए रैन बसेरे में नहीं जा सकता। सड़क किनारे ही बिस्तर बिछाकर सो जाता हूं। - राजू
मैं एक दुकान पर मजदूर हूं और शटरिंग का काम करता हूं। घर कटघर इलाके में ही है लेकिन वहां कोई अपना नहीं। इसलिए घर नहीं जाता। जहां जगह मिलती है सो जाता हूं। रैन बसेरे के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। - अमित
मैं बुलंदशहर का रहने वाला हूं। तीन महीने से घर से निकला हुआ हूं। मजदूरी करके पेट भर लेता हूं। रेलवे स्टेशन या बाजार में जहां जगह मिलती है सो जाता हूं। कभी रैन बसेरे में जाने की कोशिश नहीं की। - सोनू, बुलंदशहर