मुरादाबाद। पीतल नगरी का वायु प्रदूषण गुरुवार रात एक बार फिर देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 365 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। पहले स्थान पर कानपुर 435 एक्यूआई के साथ दर्ज किया गया। मुरादाबाद के वायु प्रदूषण में भारी कणों और गैसों का स्तर मानक से बहुत ज्यादा था। विशेषज्ञों के अनुसार शहर की अवैध पीतल भट्ठियों का संचालन और ई-कचरा जलना इस प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गुरुवार रात नौ बजे जारी किए गए आंकड़ों में 117 शहरों के वायु गुणवत्ता सूचकांक में 12 शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक तीन सौ से अधिक रहा। इसमें अकेले कानपुर का एक्यूआई चार सौ से अधिक था, जबकि दूसरे नंबर पर मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 365 था।
मानक से आठ गुना अधिक है पीएम 2.5
विशेषज्ञों के अनुसार 24 घंटे में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का मानक 50 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का मानक 60 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर है। जबकि सीपीसीबी द्वारा प्रति घंटे पर आंकड़े जारी किए जाते हैं। इसके हिसाब से जो 24 घंटे के लिए मानक निर्धारित हैं, उसके अनुरूप पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर एक घंटे में ही आठ गुना अधिक है। वहीं, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का स्तर दोगुना से अधिक है। रात नौ बजे पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 485, औसत 365, न्यूनतम 308, पीएम 10 का अधिकतम स्तर 474, औसत 269 और न्यूनतम 144 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 116, न्यूनतम 29 और औसत 54 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
जहरीला धुआं उगलती हैं अवैध पीतल भट्ठियां
नेशनल एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम की समन्वयक डॉ. अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि पीतल भट्ठियों के धुआं से कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, पीएम 10 और पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता है। पीएम 10 सांस नली तक जाता है, लेकिन पीएम 2.5 बहुत महीन कण होने की वजह से फेफड़ों के माध्यम से खून में मिल जाते हैं। स्थिति यह है कि लोगों के बाल और नाखूनों में भी मेटल की मात्रा मिली है। व्यक्तियों की स्वास्थ्य की जांच करने पर कैडमियम, क्रोमियम, आर्सेनिक, पारा, लेड पांचों मेटल हैं। यह शरीर में होने नहीं चाहिए। इससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों से पीड़ित मरीज भी मिले हैं। पालिश करने से निकिल धातु निकलती है, जो सांस के साथ पालिश करने वाले कारीगरों के शरीर में चली जाती है।
लालच के लिए दूसरों की जान जोखिम में डालने से गुरेज नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार ई-कचरा जलाकर लोग अपना मुनाफा कमाते हैं। भले ही यह किसी की सांसों के लिए संकट बन रहा है। ई-कचरे में गोल्ड, सिल्वर, कॉपर होता है। मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की ग्रीन चिप में गोल्ड और सिल्वर के टांके लगे होते हैं। इसलिए यह इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट है। इसके जलने से हानिकारक गैसों और भारी कणों का रिसाव होता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी प्रदूषित शहरों की सूची
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक
कानुपर 435
मुरादाबाद 365
आगरा 361
बुलंदशहर 346
गाजियाबाद 327
ग्रेटर नोएडा 324
धरुहेरा 323
आसनसोल 321
वाराणसी 321
नोएडा 314
लखनऊ 310
कोलकाता 305