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Moradabad seat: तीन चुनावों में हर बार नई पार्टी को विजय, बढ़ता गया जीत का अंतर.. इस बार 13 प्रत्याशी उतरे

Fri, 29 Mar 2024 01:42 PM IST
विमल शर्मा मोहम्मद सलाम खां, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद लोकसभा सीट पर मतदाताओं ने हर बार विजयी दलों को बदला है। इस बार अभी तक 13 प्रत्याशी मैदान में हैं जबकि नाम वापसी का एक दिन शेष है। इसके बार प्रत्याशियों की स्थिति साफ हो जाएगी। इस बार इस सीट पर सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।  
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मुरादाबाद लोकसभा सीट पर उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद लोकसभा सीट पर पिछले तीन चुनावोंं में जीत के साथ दल भी बदलते गए हैं। साथ ही जीत का अंतर भी बढ़ता गया। तीनों चुनावों में सपा, भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीत मिली है। फिलहाल नामांकन पत्रों की जांच के बाद मुरादाबाद सीट पर प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की स्थिति साफ हो गई है। अगर नाम वापसी तक यही स्थिति बनी रही तो 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में होंगे।

 

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इस बार लोकसभा चुनाव में गठबंधन के साथी बदल चुके हैं। वर्ष 2019 का चुनाव मिलकर लड़ने वाली सपा, बसपा और रालोद की राहें जुदा हैं। तीन दल अलग-अलग हैं। बसपा अकेले चुनाव मैदान में है तो सपा कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। वहीं रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन है। भाजपा मंडल की पांच सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एकमात्र बिजनौर सीट से रालोद प्रत्याशी चुनाव में है।
 

ऐसे ही पांच सीटों पर सपा ने उम्मीदवार उतारे हैं। अमरोहा सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। मुरादाबाद लोकसभा सीट से भाजपा ने पूर्व सांसद सर्वेश सिंह को लगातार चौथी बार उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले सर्वेश सिंह 2009, 2014 और 2019 का चुनाव लड़ चुके हैं। उन्हें एक बार जीत मिली है। बाकी दो चुनाव में उन्हें हार मिली है। बसपा ने इस बार ठाकुरद्वारा नगर पालिका अध्यक्ष इरफान सैफी को अपना प्रत्याशी बनाया है।

 
 

वह पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं सपा में टिकट की खींचतान के बाद बिजनौर की पूर्व विधायक रुचि वीरा अब चुनाव मैदान में हैं। वह बिजनौर से जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। मुरादाबाद लोकसभा सीट के तीन चुनावों के आंकड़ों के मुताबिक हर चुनाव में मतदाताओं ने विजयी दल को बदल दिया है। वर्ष 2019 के चुनाव में सपा तो 2014 के चुनाव में भाजपा को जीत मिली थी।

 
 

वहीं 2009 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। यही नहीं विजयी दल के उम्मीदवारों के जीत का अंतर भी बढ़ता गया है। वर्ष बृहस्पतिवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद भाजपा, सपा और बसपा समेत 15 प्रत्याशियों के आवेदन सही पाए गए हैं। तीस मार्च को नाम वापसी का आखिरी दिन है। लेकिन अभी से ही हार जीत के समीकरण का गुणा भाग शुरू हो गया है।

 
 

गठबंधन के सहारे दर्ज की थी जीत

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा और रालोद मेंं गठबंधन था। मुरादाबाद लोकसभा सीट सपा के खाते में आई थी। यहां से पार्टी ने डॉ. एसटी हसन को उम्मीदवार बनाया था। गठबंधन के सहारे सपा ने भाजपा उम्मीदवार सर्वेश सिंह का शिकस्त दी थी।

 
 

विपक्ष का हो गया था सूपड़ा साफ

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मंडल में मोदी की आंधी में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया था। पार्टी ने मंडल की सभी छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। मुरादाबाद सीट से भाजपा प्रत्याशी सर्वेश सिंह ने सपा प्रत्याशी डॉ. एसटी हसन को पराजित किया था।

 
 

सियासी पिच पर अजहर की जीत

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव कांग्रेस ने मुरादाबाद सीट से टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को उम्मीदवार बनाया था। सियासी पिच पर उतरे अजहर ने शानदार जीत दर्ज की थी। अजहर के सामने भाजपा ने सर्वेश सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था।

 
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तीन लोकसभा चुनावों में प्रमुख दलों की स्थिति

वर्ष        भाजपा        सपा          बसपा      कांग्रेस    जीत का अंतर
2019     551416      649538       -           59198      98122
2014      485224     397720     160945   19732      87504
2009     252176     27982     147594     301283     49107
नोट : वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन था। 

 
 
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