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मुरादाबाद : ये कैसा मंजर ...अस्पतालों में नहीं जगह, गेट पर दम तोड़ रही जिंदगी

Sat, 24 Apr 2021 02:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा विकास शुक्ला, मुरादाबाद

सार

  • 350 किलोमीटर दूर लखनऊ से बेड की आस में आए वसीम ने उपचार के दौरान गेट पर ही तोड़ा दम
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जीवन की जद्दोजहद... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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अस्पताल के अंदर जिंदगी पर कसता कोरोना का शिकंजा उसे कमजोर कर रहा है और अस्पताल के बाहर उसकी वजह से बने हालात जिंदगी को खत्म कर रहे हैं। बेड की आस में 350 किलोमीटर दूर मुरादाबाद पहुंचे लखनऊ निवासी ने अस्पताल के गेट पर एंबुलेंस में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

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प्रदेश के तमाम शहरों में अस्पताल पूरी तरह से भर चुके हैं। मुरादाबाद में भी अब हालात कुछ ऐसे ही होते जा रहे हैं। आलम ये है कि कोरोना मरीज तो रोजाना अपनी जान गंवा ही रहे हैं। दूसरी बीमारियों की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे मरीज भी समय पर बेड और उपचार न मिलने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। कोरोना संक्रमण से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

शुक्रवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो कहीं बेड के इंतजार में मरीज व्हील चेयर पर दिखे तो कहीं फर्श पर बेसुध मिले। शहर में नौ निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमण के मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन ने यहां मरीजों की फीस भी निर्धारित की है। इन अस्पतालों की व्यवस्थाओं के लिए तहसीलदार और एसडीएम को बतौर नोडल अधिकारी नामित किया गया है,लेकिन आईसीयू और आइसोलेशन वार्ड फुल होने की वजह से गंभीर मरीजों की जान जा रही है।
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दर्दनाक : चार साल का बेटा मम्मी कहकर बिलख रहा
मानसरोवर कॉलोनी निवासी अनमोल गुप्ता की 31 वर्षीय पत्नी पूनम को मामूली बुखार आया। गुरुवार की शाम को उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई तो वे परिजनों के साथ पत्नी को लेकर पहले एपेक्स गए, जहां से उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि कोई बेड खाली नहीं है, यहां से साईं अस्पताल ले गए, लेकिन यहां भी बेड नहीं मिला। हालत बिगड़ती देख जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी इलाज नहीं मिल सका और रात 12 बजे पूनम ने दम तोड़ दिया। उधर पूनम के चार वर्षीय मासूम बेटे दक्ष का रो-रोकर बुरा हाल है। वह मम्मी को ढूंढता है और न पाकर बिलखने लगता है। ये देख परिवार वाले बेसुध से हो गए हैं।

त्रासदी : लखनऊ से ऑक्सीजन पर आ गए, मुरादाबाद में चल बसे वसीम
लखनऊ निवासी 50 वर्षीय वसीम शेख की कोरोना पॉजिटिव आने के बाद हालत बिगड़ती चली गई। एक अधिकारी ने बताया कि लखनऊ में वसीम शेख को वेंटीलेटर नहीं मिला, तभी किसी ने बताया कि मुरादाबाद में इलाज हो जाएगा। उम्मीद लेकर उनके परिजन ऑक्सीजन लगाकर एंबुलेंस से मुरादाबाद ले आए, लेकिन यहां अस्पतालों में भी बेड फुल मिले। इसी बीच वे ब्राइट स्टार अस्पताल पहुंचे, वहां भी कोई बेड खाली नहीं था, लेकिन डॉक्टर उनका परीक्षण करने को राजी हो गए। अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में ही डॉक्टर उनका परीक्षण कर रहे थे, तभी उन्होंने दम तोड़ दिया।

ये मरीज बयां कर रहे स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत
कांशीराम कॉलोनी निवासी शांति देवी शुक्रवार को बुखार और सांस लेने में दिक्कत होने के कारण जिला अस्पताल आईं, लेकिन एक घंटे तक इंतजार करने के बाद भी इलाज नहीं मिल सका। इससे वह पस्त होकर फर्श पर लेट गईं। वहीं कटघर निवासी राम किशोरी को परिजन व्हील चेयर पर लेकर जिला अस्पताल में पहुंचे। उन्हें भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और बुखार भी बताया, लेकिन जिला अस्पताल में किसी ने हाथ तक नहीं लगाया। बेड खाली न होने की जानकारी पाकर दोनों के तीमारदार उन्हें लेकर लौट गए।

मुरादाबाद में नहीं खत्म होने देंगे ऑक्सीजन : कमिश्नर
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा है कि मुरादाबाद मंडल में निरंतर अस्पतालों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। यही वजह है कि अन्य महानगरों की तुलना में हमारे यहां दिक्कत काफी कम है। ऑक्सीजन की कमी की बाबत कहा कि उनके पास वर्तमान में पर्याप्त स्टाक है और दस टन लिक्विड कनेक्शन आज और पहुंच गया। इससे बैकअप बना रहेगा। उन्होंने जनता से अपेक्षा की है कि लोग कोरोना के लक्षण मिलते ही टेस्ट करा लें और होम आइसोलेट होकर एहतिआत बरतें। लोग मामूली खराश, बदन दर्द और जुकाम को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे गंभीर हालत हो जाती है। स्वस्थ रहने के लिए मामूली लक्षण पर इलाज होकर जल्दी ठीक हो सकते हैं। उन्होंने सभी से संयम बरतने की भी अपील की।

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