प्रदूषण के खिलाफ सरकार, एनजीटी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सख्त है। इसके बावजूद जिला प्रशासन प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम है। रामगंगा नदी किनारे खुलेआम ई-कचरा जलाया जा रहा है और गलियों में भी पीतल की भट्ठियां धधक रही हैं। जिसके कारण प्रदूषण का स्तर घटने के बजाय बढ़ रहा है। 11 दिन से ट्रंचिंग ग्राउंड में सुलग रही आग भी शहर के वातावरण में पलीता लगा रही है।
बुधवार को शाम सात बजे मुरादाबाद का एक्यूआई 368 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बराबर रहा। यह आंकड़ा देश में तीसरे स्थान का है। पहले स्थान पर 417 एक्यूआई के साथ कुरुक्षेत्र और दूसरे पर 410 एक्यूआई के साथ करनाल रहा।
पिछले एक सप्ताह से शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगभग 300 एक्यूआई के आस-पास चल रहा है। बीच-बीच में यह स्तर 400 एक्यूआई के पार भी पहुंच रहा है। मंगलवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 361 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था, जो बुधवार को 368 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर हो गया। शहर की वायु के जहरीले स्तर के बावजूद गलियों में पीतल की भट्ठियां धधक रही हैं।
मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से भट्ठियों को बंद करवाने की कार्रवाई की गई थी लेकिन यह कार्रवाई यहीं ठिठक गई। रामगंगा नदी के दूसरी ओर भोजपुर क्षेत्र में खेतों में ई कचरा जलाने की घटनाओं को भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग और प्रशासन नहीं रोक पा रहा है। वातावरण में पीएम 2.5 की अधिकतम उपलब्धता 500, औसत 368 और न्यूनतम 306 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रही।
पीएम 10 का स्तर अधिकतम 500 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया। औसत 297 और न्यूनतम 197 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा। वायु में बढ़ते जहरीले स्तर के बीच नागरिक भी अब स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे हैं। सुबह के समय वह घर से बाहर निकलते समय मॉस्क का इस्तेमाल करने लगे हैं।
ई-कचरा जलने के मामले में टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी। सहायक नगरायुक्त से जानकारी मिली है कि ट्रंचिंग ग्राउंड की आग बुझ गई है। इसका गुरुवार तक असर देखने को मिल जाएगा।
-अजय कुमार शर्मा, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स में बुधवार सात बजे दर्ज किया गया देश के शहरों का प्रदूषण
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक
कुरुक्षेत्र 417
करनाल 410
मुरादाबाद 368
लखनऊ 368
पानीपत 362
कानपुर 358
मेरठ 357
गाजियाबाद 351
पटना 337
कैथल 320
मानेसर 314