मुरादाबाद के एबीएम अस्पताल में नर्स से दुष्कर्म मामले में नया खुलासा हुआ है। इस शख्स ने सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर चोरी की थी। आरोपी ने पूछताछ में बताया है कि वह साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से डीवीआर चोरी किया था।
मुरादाबाद के एबीएम अस्पताल में नर्स से दुष्कर्म की घटना के बाद आरोपी डॉ. शाहनवाज का भाई फैजान सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर चोरी कर ले गया था। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) बरामद कर लिया।
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आरोपी ने पूछताछ में बताया है कि वह साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से डीवीआर चोरी किया था। डिलारी के राजपुर केसरिया निवासी शाहनवाज ठाकुरद्वारा में काशीपुर रोड स्थित एक भवन में एबीएम अस्पताल चल रहा था। 17 अगस्त की रात डॉक्टर ने डिलारी के एक गांव निवासी नर्स के साथ दुष्कर्म किया था।
इस मामले में पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर डॉ. शाहनवाज, दूसरी नर्स मेहनाज और वार्ड बॉय जुनैद के खिलाफ केस कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच के दौरान पुलिस ने अस्पताल में जाकर कैमरे चेक किए तो डीवीआर गायब था।
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बाद में जानकारी मिली कि डीवीआर डॉक्टर का भाई फैजान चुरा ले गया है। शुक्रवार को पुलिस ने राजपुर केसरिया निवासी फैजान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने केस में साक्ष्य मिटाने की धारा बढ़ा ली है। सीओ ठाकुरद्वारा राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
डीवीआर से बेनकाब होंगे कई चेहरे
पुलिस को अस्पताल की डीवीआर हाथ लग चुकी है। आरोपी फैजान ने डीवीआर से छेड़छाड़ कर साक्ष्य मिटा दिए हैं, लेकिन पुलिस ने डाटा रिकवरी के लिए डीवीआर को फोरेंसिक लैब भेजेगी। इसके अलावा एक्सपर्ट की मदद भी ली जा रही है। डाटा रिकवर होते ही वो चेहरे भी बेनकाब हो जाएंगे जो घटना वाली रात अस्पताल में मौजूद थे और घटना होने के बाद गायब हो गए। इनमें डॉक्टरों के अलावा अन्य स्टाफ भी शामिल है। फुटेज के आधार पर पुलिस केस में आरोपियों के नाम बढ़ा सकती है।
पुलिस आज दाखिल कर सकती है चार्जशीट
नर्स से दुष्कर्म के आरोपी शाहनवाज सहित तीन के खिलाफ पुलिस शनिवार को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। केस की विवेचना कर रहे सीओ राजेश कुमार ने मामले की जांच लगभग पूरी कर ली है। उन्होंने घटना से संबंधित लगभग सभी साक्ष्य जुटा लिए हैं।
सीओ ने बताया कि अब तक जुटाए गए सभी साक्ष्यों को शनिवार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि समय से साक्ष्य प्रयोगशाला में जमा हो गए तो शनिवार को ही कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो जाएगी।
10 साल से चल रहे थे मदरसे, आंखें मूंदे रहे अधिकारी
दुष्कर्म के आरोपी डॉ. शाहनवाज के पिता के मदरसों को मान्यता देने में अफसरों ने लापरवाही बरती। अस्पताल में घटना नहीं हुई होती तो शायद ही इस खेल का खुलासा हो पाता। 10 साल तक न तो किसी अधिकारी ने जांच कराई और न ही इन मदरसों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ बंद किया गया।
डिलारी क्षेत्र में जटपुरा स्थित मदरसा अरबिया सकलैनिया जामेउल बनात को आलिया स्तर की स्थायी मान्यता 15 जून 2014 और आलिम स्तर की मान्यता 31 मार्च 2017 को प्रदान की गई थी। दोनों मदरसों को जिस भूमि पर मान्यता दी गई है उस जमीन का बैनामा 16 जून 2017 को किया गया था। मदरसा या मदरसा संचालक सोसायटी के नाम जमीन नहीं है।
वास्तविक अभिलेख छिपाकर मान्यता ली गई थी। जिस जमीन पर मदरसा दर्शाकर मान्यता ली थी, उस जमीन का बैनामा ही बाद में कराया गया। इससे साफ होता है कि मदरसा केवल कागजों में चल रहा था। इतना नहीं मदरसों को सरकारी योजना का लाभ भी दिया गया। 11 साल से चल रहे इस फर्जीवाड़ा में संबंधित विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।