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Moradabad News: मुरादाबाद के प्राइवेट स्कूलों में बेटे...सरकारी स्कूलों में बेटियां अधिक

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मुरादाबाद। बेटियों को लेकर भले ही बराबरी के दावे किए जाते हों। सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद करती हो। लेकिन उनके साथ शिक्षा को लेकर आज भी भेदभाव बरता जा रहा है। विभागीय आंकड़ों में भी यह साफ दिखाई दे रहा है। प्राइवेट स्कूलों में हुए दाखिलों के आंकड़े देखें तो यहां पर बेटों की संख्या अधिक है, जबकि सरकारी स्कूलों के नामांकन में बेटियां आगे निकल गई हैं। परिषदीय स्कूलों में बेटियां 74191 हैं, जबकि बेटे 64437 पढ़ रहे हैं। वहीं पब्लिक स्कूलों में 134876 बेटे और 109482 बेटियां पढ़ रही हैं।
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केस 1...

बोली बेटियां..पापा ने कहा कि आठवीं तक सरकारी में पढ़ो
कन्या जूनियर हाईस्कूल मऊ में कक्षा सात में पढ़ रहीं दो बहनों ने बताया कि उनका भाई मोरा की मिलक के एक निजी स्कूल में पढ़ रहा है। इनके पिता छोटी सी दुकान करते हैं। इन बेटियों ने बताया कि पिता ने भरोसा दिलाया है कि नौंवी कक्षा में प्राइवेट स्कूल में दाखिला करा देंगे। वहीं इसी स्कूल में कक्षा आठ में पढ़ रही छात्रा ने बताया कि उसका भाई हरथला में एक निजी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ रहा है।



केस..2
सभी बच्चों को प्राइवेट में नहीं पढ़ा सकते...इसलिए बेटों का कराया दाखिला
कंपोजिट विद्यालय महेशपुर भीला मूंढापांडे में कक्षा आठ में पढ़ रही छात्रा का भाई भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहा है। उसका नर्सरी में ही दाखिला करा दिया गया था। जबकि वह तीनों बहनें सरकारी स्कूल में ही पढ़ रही हैं। इसी तरह एक छात्रा कक्षा पांच में है। वह तीन बहनें और एक भाई है। वह भी अपनी बहनों की तरह परिषदीय स्कूल में पढ़ रही है, जबकि भाई निजी स्कूल में कक्षा सात में है। विद्यालय की शिक्षिका ने बताया कि दोनों छात्राओं के पिता मजदूरी करते हैं। अभिभावकों का कहना है कि वह सभी बच्चों को प्राइवेट में नहीं पढ़ा सकते, इसलिए बेटों का दाखिला करवाया है। शिक्षिका के अनुसार यह छात्राएं पढ़ने में बहुत तेज हैं और नियमित स्कूल आती हैं। कक्षा आठ में पढ़ रही छात्रा अपनी क्लास में तीसरे स्थान पर आई है।
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केस 3...

बेटों की करवा लें बेहतर पढ़ाई

उच्च प्राथमिक विद्यालय साहू नगला में कक्षा छह में दो सगी बहनें पढ़ती हैं, जबकि उनका भाई कक्षा चार में एक निजी स्कूल में पढ़ता है। इसी तरह कक्षा आठ की छात्रा का भाई कक्षा पांच में एक निजी स्कूल में पढ़ रहा है। परिवार वालों का कहना है कि पब्लिक स्कूलों की फीस ज्यादा होती है। ऐसे में बेटियों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं।

इनसेट...
बोर्ड परिणाम में आगे रहीं हैं बेटियां
इस वर्ष यूपी बोर्ड द्वारा जारी किए गए परिणाम में हाईस्कूल की मेरिट में 17 मेधावियों ने जगह बनाई थी। इनमें 13 छात्राएं थीं। इस मेरिट में पहला और दूसरा स्थान भी बेटियों का ही था। वहीं, इंटरमीडिएट की टॉप टेन में 12 विद्यार्थी थे। इसमें दस बेटियां शामिल हैं।




बॉक्स...
नोट... बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार (2025-26)



स्कूल लड़के लड़की कुल

बेसिक 1409 64437 74191 138628



पब्लिक स्कूल/ माध्यमिक (1-8) 1320 134876 109482 244358

पब्लिक स्कूल/ माध्यमिक(1-12) 1734 254945 211958 466903



सभी माध्यम सभी वर्ग 3936 368689 335983 704672

वर्जन...



स्कूल चलो अभियान के साथ मीना मंच का कार्यक्रम चलता है। यह सिर्फ लड़कियों का मंच है। हर स्कूल में 15 से 20 छात्राओं को शामिल किया जाता है। इसके माध्यम से नेतृत्व क्षमता के गुण सिखाए जाते हैं और सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए जागरूक किया जाता है। हम बेटा-बेटियों को बराबर ध्यान दे रहे हैं। समाज की सोच सदियों पुरानी है। उसमें धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। अब बालिका और बालक स्कूलों को भी को-एड किया जा रहा है। - वेगीश सिंह गोयल, खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र
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