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Moradabad: बिजली विभाग के 24 घंटे बत्ती के दावे में करंट नहीं, अफसरों की लापरवाही से तीन साल बाद भी काम अधूरा

Mon, 10 Nov 2025 06:15 PM IST
विमल शर्मा शिवम वर्मा, अमर उजाला मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद में 45 करोड़ रुपये का स्काडा प्रोजेक्ट लापरवाही के कारण अधर में लटका है। साढ़े तीन साल बाद भी न तो ऑप्टिकल फाइबर केबिल का काम पूरा हुआ, न कंट्रोल रूम तैयार हो सका। निजी कंपनी और विद्युत निगम के बीच भुगतान व तकनीकी खामियों को लेकर विवाद के चलते प्रोजेक्ट अटका है। इससे लोगों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। 
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बिजली विभाग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद के 10 बिजलीघरों को आपस में जोड़कर 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने के दावे में फिलहाल कोई करंट नहीं है। 45 करोड़ रुपये का स्काडा प्रोजेक्ट निजी कंपनी व विद्युत निगम की लापरवाही से अधर में फंस गया है। साढ़े तीन साल बाद भी न तो पूरी तरह ऑप्टिकल फाइबर केबिल का काम निपटा है, न ही कंट्रोल रूम बन पाया है।

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निजी कंपनी ने सर्वे में सब ठीक बताया लेकिन अब बाधाओं के कारण स्काडा नहीं लग पा रहा है। कंट्रोल रीम में ढांचागत सुधार के बाद अब बजट का मुद्दा अटक गया है। विद्युत निगम के मुताबिक नगर निगम की ओर से ठेकेदार को भुगतान नहीं किया है। उधर, विभागीय जानकारों का कहना है कि विद्युत निगम के काम में तकनीकी खामियां हैं।

कार्य करने वाली कंपनी के कमजोर बिंदुओं पर विद्युत अफसरों ने पहले ध्यान नहीं दिया। अब देरी होने के बावजूद काम पूरा करने में पसीने छूट रहे हैं। कार्य पूरा होने में अब भी दो माह का समय लग जाएगा। कुल 90 करोड़ रुपये के स्मार्ट विद्युत प्रोजेक्ट में 45 करोड़ रुपये से तारों को अंडरग्राउंड करने, नए ट्रांसफार्मर व केबिल लगाने के काम हुए हैं।
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बाकी 45 करोड़ से स्काडा प्रोजेक्ट लगाया जाना है। स्काडा का पूरा नाम सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजीशन है। इसके तहत शहर के 10 बिजलीघरों को ऑप्टीकल फाइबर केबिल के जरिए आपस में जोड़ा जाना है।

एक जगह फाल्ट होने पर दूसरे बिजलीघर से खुद शुरू होगी सप्लाई 
विद्युत निगम का दावा है कि बिजलीघर आपस में जोड़े जाने के बाद इसकी मॉनिटरिंग के लिए अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। यदि किसी एक बिजलीघर के क्षेत्र में फाल्ट से बिजली आपूर्ति बाधित होगी तो कंट्रोल को पता चल जाएगा। साथ ही स्काडा के जरिये दूसरे बिजलीघर से स्वत: ही सप्लाई शुरू हो जाएगी।

इस तरीके से शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो सकेगी। इस काम का जिम्मा निजी कंपनी रिलाइंस इलेक्ट्रिक को दिया गया है। कंपनी की लापरवाही के कारण काम अधर में फंसा है। पहले चरण का काम शुरू करने में भी कंपनी ने एक साल की देरी की थी। अब दूसरे चरण का काम लटका दिया है।

एमडी पीवीवीएनएल ने जताई नाराजगी 
तीन दिन पहले मुरादाबाद दौरे पर आए पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने स्काडा कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने देरी का कारण अधिकारियों से पूछा और अब तक की स्थिति जानी। साढ़े तीन साल में कार्य न होने पर उन्हें नाराजगी भी जताई।

नगर निगम के अधिकारियों से समन्वय कर जल्द से जल्द कार्य पूरा कराने के निर्देश विद्युत अभियंताओं को दिए। कंट्रोल रूम में मॉनिटरिंग स्क्रीन पर लाइव देखा जा सकेगा कि फाल्ट कहां हुआ है। एक बिजली से दूसरे बिजलीघर को जोड़ने के लिए ओएफसी के अलावा रिंग मेन्स यूनिट भी लगाए गए हैं।
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स्काडा प्रोजेक्ट का काम पिछड़ने के पीछे कई कारण हैं। अब हमने 30 नवंबर तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अवधि में स्काडा सिस्टम को तैयार करने के लिए टीम जुट गई है। तकनीकी बाधाएं दूर की जा रही हैं। - अशोक कुमार चौरसिया, मुख्य अभियंता
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