मोटापा भी कुपोषण का कारण, इनका कोई सर्वे नहीं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके दत्त और डॉ. शलभ अग्रवाल का कहना है कि पिछले आठ वर्षों में कुपोषण का ग्राफ बदला है। अंडर वेट वाले बच्चे कम हुए हैं। ज्यादा वजन वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यह बच्चे भी कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। जंक फूड खाने व शारीरिक गतिविधि न होने के कारण इनमें शुगर की समस्या उत्पन्न हो गई है।
एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मो. रजी की ओपीडी में ऐसे केस आए हैं, जिनमें 12 साल के बच्चे का वजन 90 किलो है। बाल विकास विभाग ऐसे बच्चों का कोई सर्वे नहीं करता, जबकि जिलाधिकारी भी बैठक में कई बार इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं।
| क्षेत्र (ब्लॉक/शहर) |
कुपोषित बच्चों की संख्या |
| मुरादाबाद शहर |
454 |
| बिलारी |
220 |
| कुंदरकी |
199 |
| मुरादाबाद देहात |
164 |
| डिलारी |
158 |
| छजलैट |
138 |
| मूंढापांडे |
130 |
| भगतपुर टांडा |
96 |
| ठाकुरद्वारा |
89 |
नोट: यह आंकड़ा जुलाई 2025 का है।
कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र हैं। सभी 10 बेड फुल हैं। हर दिन औसतन दो बच्चे यहां भर्ती करने पड़ते हैं। 14 दिन तक इन्हें प्रोटीन व आयरन युक्त आहार दिया जाता है। इसके बाद हर 15 दिन में फॉलोअप के लिए बुलाते हैं। -डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक
वर्तमान में अंडरवेट और ओवरवेट दोनों बच्चों की संख्या लगभग समान है। दोनों की चिंता अनिवार्य है। अंडरवेट वालों को अच्छा आहार देकर पोषित किया जा सकता है। ओवरवेट वाले बच्चों को मोबाइल, जंक फूड से दूरी बनानी होगी। भविष्य में शुगर, बीपी, हृदय रोगों का खतरा है। - डॉ. शलभ अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ