शहरवासी कड़ाके की सर्दी के साथ वायु प्रदूषण झेलने को मजबूर हो रहे हैं। तंग गलियों में धधकतीं अवैध पीतल भट्ठियों और ई-कचरे की वजह से मुरादाबाद की हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है। गुरुवार रात 11 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदूषित शहरों की सूची में मुरादाबाद तीसरे नंबर पर था। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 397 दर्ज किया गया। पहले स्थान पर फरीदाबाद 432 और दूसरे पर गाजियाबाद व नोएडा 404 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
मुरादाबाद के लालबाग, गलशहीद, बरबलान, नागफनी, मुगलपुरा आदि इलाकों में अवैध पीतल भट्ठियां संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद ई-कचरे के धंधे पर भी लगाम नहीं लग पा रही है। शहरवासियों की सांसों में जहर घोलने के लिए दिल्ली से ई-कचरा मुरादाबाद लाकर जलाया जाता है। पीतल भट्ठियों और ई-कचरे से निकलने वाले धूआं की वजह से हवा में भारी कणों की मात्रा मानकों से करीब आठ गुना अधिक है।
गुरुवार रात 11 बजे मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 397 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर पांच सौ, पीएम 10 का अधिकतम स्तर 493 और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 94 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर सांस की बीमारी होने की आशंका हो जाती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्र के अनुसार कड़ाके की सर्दी होने की वजह से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। तेज हवा चलने और मौसम साफ होने से वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आएगी।