दीपावली का त्योहार आने में अभी दस दिन का समय शेष है, लेकिन बुधवार को पीतल नगरी के प्रदूषण ने पूरे वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बुधवार को मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 449 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 और पीएम 10 का अधिकतम स्तर पांच सौ माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा।
रात को पीतल नगरी धुंध की परत में छुप गई। दिनभर प्रदूषण के हालातों से शहरवासी परेशान हो गए। उन्हें सांस लेने के साथ आंखों में जलन की समस्या झेलनी पड़ी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कण सांसों के माध्यम से रक्त में घुल जाते हैं, जिनसे जानलेवा बीमारियां होने की आशंका बनी रहती है।
बुधवार सुबह दस बजे मुरादाबाद का एक्यूआई 412 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। उस वक्त अंबाला 438 एक्यूआई के साथ पहले स्थान पर था, लेकिन समय के साथ मुरादाबाद का प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया। आसमान में धुंध की परत छा गई। शाम पांच बजे से राहगीरों को अपने वाहनों की लाइटें जलाकर चलना पड़ा। रात होते-होते पूरे शहर पर धुंध की परत छा गई। विशेषज्ञों के अनुसार वातावरण में प्रदूषित कणों की भरमार है। यदि सजगता नहीं बरती गई तो प्रदूषण का यह स्तर लोगों को गंभीर रूप से बीमार बना सकता है।
वर्ष 2017 में हुआ था पांच सौ एक्यूआई
पिछले वर्ष चार नवंबर को मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 454 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था, जबकि वर्ष 2017 में सात नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक पांच सौ माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के किए जाने वाले दावे सर्दी का मौसम शुरू होते ही हवा हो जाते हैं। बुधवार को वर्ष का सबसे अधिक प्रदूषण का रिकॉर्ड भी टूटा है। इससे पहले 26 अक्तूबर को 413 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और मंगलवार तीन नवंबर को 410 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर प्रदूषण रहा था।
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक
बागपत 452
मुरादाबाद 449
गाजियाबाद 438
हापुड़ 432
जींद 428
ग्रेटर नोएडा 427
अंबाला 420
बुलंदशहर 414
फतेहाबाद 412
दिल्ली 409
मेरठ 409
नोएडा 408
(बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए आंकड़े। प्रदूषण का यह स्तर रात दस बजे का है)
दीपावली से पहले प्रदूषण का यह स्तर डराने लगा है। नगर निगम की ओर से सड़कों को साफ नहीं किया जा रहा है। वाहनों का जाम लगा रहता है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है।
कमल चड्ढा, प्रभात मार्केट।
बुधवार को पहली बार सड़क पर पानी का छिड़काव किया है, लेकिन यह प्रयास काफी नहीं है। आगामी दिनों में दीपावली का त्योहार आ रहा है। ऐसे तो मुरादाबाद की स्थिति बहुत दयनीय हो जाएगी।
डॉ. अतुल बंसल, लाजपत नगर।
आदर्श कालोनी रोड़ पर एक स्कूल के बराबर में करीब एक माह से कचरा पड़ा है, लेकिन किसी ने उठाया नहीं है। कई बार नगर निगम के अधिकारियों से आग्रह भी किया है। अवैध पीतल भट्ठियों का संचालन और वाहनों के जाम से सांस लेना दूभर हो गया है।
करन राज मिगलानी, ईदगाह रोड़।
सात नवंबर को 2017 को पांच सौ एक्यूआई हुआ था। इसके बाद इतना प्रदूषण कभी नहीं हुआ था। इसकी वजह से फ्रांस की टीम आई थी। उन्होंने लालबाग, लाजपत नगर और जामा मस्जिद का निरीक्षण किया था। मुरादाबाद का यह स्तर पहली बार था। इससे पहले इतना प्रदूषण का स्तर कभी नहीं हुआ था। धूआं, जाम और ई-कचरा प्रमुख कारण थे। इस प्रदूषण में गैस की अपेक्षा पर्टिकुलैट मैटर ज्यादा है। यह इतना घातक है कि सांसों के जरिए खून में घुल जाता है। रक्त के संग पूरे शरीर में प्रवाहित होता है। यह कैंसर जनित होता है।
डॉ. अनामिका त्रिपाठी, समन्वयक, नेशनल एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम, हिंदू कालेज।