बिलारी में अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा 1983 में आवंटित 34 दुकानों में से 29 पर फर्जीवाड़ा कर अवैध कब्जा किया गया है। जांच में फर्जी आवंटन पत्र सामने आए। अब जिला समाज कल्याण विभाग 29 दुकानों का आवंटन निरस्त कर कब्जा मुक्त कराने की तैयारी कर रहा है।
बिलारी में अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा वर्ष 1983 में अलॉट की गईं 34 दुकानों में से 29 दुकानों पर फर्जीवाड़ा कर अवैध रूप से कब्जा मिला। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने संबंधित दुकानों का आवंटन निरस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि बिलारी तहसील क्षेत्र में अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा वर्ष 1983 में 34 दुकानों का आवंटन किया गया था।
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बिलारी के नुरुद्दीनपुर उर्फ गंज निवासी दानवीर सिंह और बिलारी के शेरपुर माधो उर्फ धनियाखेड़ा निवासी जितेंद्र ने दस जून 2020 को एसडीएम बिलारी के कार्यालय में प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि रुस्तमपुर सहसपुर की दस दुकानों का आवंटन उन्हें किया गया है, लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिलाया गया है।
जांच के दौरान तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी ने पत्र के जरिये बताया था कि दुकानों का कोई भी पुन: आवंटन नहीं किया गया है। दानवीर सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए आवंटन पत्र का विवरण भी किसी डाक डिस्पैच पंजिका में उपलब्ध मिला। तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार के हस्ताक्षर थे, जिससे यह पता चला कि फर्जी आवंटन पत्र तैयार किए गए हैं।
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इस मामले में दानवीर सिंह, जितेंद्र कुमार समेत 15 लोगों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा एक सुपरवाइजर, तीन एडीओ और एक सहायक प्रबंधक अनुसूचित जाचि वित्त विकास निगम की टीम गठित कर इसकी जांच कराई गई।
उन्होंने बताया कि केवल पांच दुकानों पर मूल आवंटी के परिजन मिले, शेष 29 दुकानदार ऐसे मिले, जिन्होंने या तो मूल आवंटियों से दुकानें खरीदीं थीं या फिर अवैध कब्जा कर लिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि 29 दुकानों का आवंटन निरस्त कर कब्जा मुक्त कराया जाएगा।