मुरादाबाद। सुबूत के तौर पर फोटो कॉपी के सहारे हाईकोर्ट में लड़ रहे मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को तगड़ा झटका लगा है। सीलिंग से प्राप्त जमीन पर एमडीए अपना कब्जा साबित नहीं कर पाया और हाईकोर्ट में हार गया। इस अहम मुकदमे को हार जाने के बाद अब एमडीए में खलबली है। चूंकि इस जमीन का रेट चालीस करोड़ रुपये से भी ज्यादा है तो इस जमीन को हाथ से निकलने पर यह एमडीए के लिए तगड़ा झटका है। अब एमडीए सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी में है।
मामला शहर से सटे शाहपुर तिगरी क्षेत्र का है। यहां एमडीए को सीलिंग की जमीन मिली थी। एमडीए सचिव प्रेरणा शर्मा के मुताबिक गाटा संख्या 2-ए तथा 2- बी में यह कुल 42587 वर्ग मीटर जमीन है जिसकी कीमत चालीस करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। इस मामले में स्थानीय निवासी ब्रज कुमार सिंह ने अपना दावा पेश कर दिया कि यह जमीन एमडीए के पास है ही नहीं। इस पर उनका कब्जा है। मामला तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन मुकुल सिंघल ने सुना तो एमडीए के पक्ष में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिर से इसका रिव्यू हुआ तथा जनवरी माह में भी वर्तमान प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन दीपक कुमार ने भी इसका फैसला एमडीए के पक्ष में सुनाया। ऐसे में एमडीए यह मानकर चल रहा था कि इस जमीन पर अब उसका ही हक रहेगा।
......पर हाईकोर्ट में साबित नहीं हो सका दावा
मामला हाईकोर्ट में गया पर एमडीए यहां अपना दावा साबित नहीं कर पाया। एमडीए सचिव के मुताबिक इस संबंधी कब्जा पत्र की छाया प्रति तो एमडीए के पास उपलब्ध है पर मूल दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में अदालत ने यह माना कि इस जमीन पर एमडीए का भौतिक कब्जा नहीं है। लिहाजा एमडीए का हक नहीं बनता।
मूल कब्जा पत्र गायब करने पर हुआ है मुकदमा
सीलिंग मिली जमीन का रिकार्ड राजस्व विभाग में होता है। इस प्रकरण का कब्जा पत्र भी प्रशासन केराजस्व विभाग में था। सचिव के मुताबिक तहसील से गायब कर दिया गया। इस पर जिलाधिकारी के निर्देश से कर्मचारियों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे: एमडीए सचिव
इस प्रकरण में हम पूरी लड़ाई लड़ेंगे। इसके लिए हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। हमारे दस्तावेज मजबूत हैं और कब्जा भी है। मुझे पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में हम जीतेंगे - प्रेरणा शर्मा सचिव एमडीए
यहां 800 प्रधानमंत्री आवास बनने की थी योजना
इस जमीन में एमडीए नियोजन की तैयारी कर चुका था। डीपीआर बन चुकी थी। पहले चरण में यहां 800 प्रधानमंत्री आवास बनाने की योजना थी लेकिन अदालत में हारने के बाद अब यह प्लान धरा रह गया है।