फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: मोरा की मिलक से प्रकाश एन्क्लेव तक बंदरों का कहर, एक दिन में तीन को काटा

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। शहर में बंदरों का आतंक अब बेकाबू होता जा रहा है। बुधवार को मोरा की मिलक (चमुंडा मंदिर के पास) में एक ही दिन में तीन लोगों को बंदरों ने काटकर घायल कर दिया। वहीं प्रकाश एन्क्लेव और आशियाना कॉलोनी के लोग भी महीनों से बंदरों के खौफ में जी रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि महिलाएं छत पर कपड़े सुखाने से डर रही हैं और बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। लगातार शिकायतों के बावजूद नगर निगम या वन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने पर लोगों में भारी नाराजगी है।
विज्ञापन




मोरा की मिलक निवासी इमरान बुधवार सुबह घर की सीढ़ियां चढ़कर कमरे में जा रहे थे। सीढ़ियों पर बैठे बंदर ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बंदर ने उनकी बाईं कलाई और दाहिने हाथ की उंगली को बुरी तरह काट लिया। चीख-पुकार सुनकर घर के लोग कमरों में दुबक गए। शोर मचाने पर बंदर भागा। इमरान को जिला अस्पताल ले जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई गई।

करीब एक घंटे बाद पड़ोसी कृष्ण इमरान का हालचाल पूछने जा रहे थे। रास्ते में बैठे बंदर ने उन पर भी झपट्टा मार दिया। हमले में उनके हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आईं। हाथ में गहरा घाव होने से चार टांके लगाने पड़े। शाम करीब पांच बजे देवराज, निवासी मोरा मुस्तकम भी बंदर के हमले का शिकार हो गए। उनके बाएं हाथ पर बंदर ने काट लिया। उन्हें भी जिला अस्पताल में उपचार कराना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो दशक में बंदरों का इतना आक्रामक व्यवहार कभी नहीं देखा। अब मोहल्ले में लोग डंडा लेकर निकल रहे हैं और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं।
विज्ञापन

प्रकाश एन्क्लेव और आशियाना जैसी पॉश कॉलोनियों में भी बंदरों के झुंड छतों पर कब्जा जमाए हुए हैं। वे पानी की टंकियों, बिजली के तारों और बालकनी में उत्पात मचाते हैं। कई बार लोगों पर झपट्टा मार चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद नगर निगम और वन विभाग केवल आश्वासन दे रहे हैं।
डीएफओ डॉ. विनय कुमार का कहना है कि शहर में बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसके बावजूद हमें जहां से सूचना मिलती है, वहां टीम भेजते हैं।

पीड़ितों के कोट्स (फोटो)
मैं सीढ़ियां चढ़कर कमरे में जा रहा था। अचानक बंदर ने हमला कर दिया। संभलने का मौका भी नहीं मिला। हाथ से लगातार खून बहने लगा। अब घर के बच्चे भी डरे हुए हैं।

- इमरान

मैं इमरान के हालचाल पूछने जा रहा था, लेकिन रास्ते में बंदर ने हमला कर दिया। हाथ में इतने गहरे घाव हुए कि चार टांके लगाने पड़े। अब अकेले निकलने में भी डर लगता है।
विज्ञापन

- कृष्ण


शाम को घर के पास ही था कि बंदर ने हाथ पर काट लिया। अब मोहल्ले में हर कोई डरा हुआ है। कब किस पर हमला हो जाए, कोई भरोसा नहीं।

- देवराज


बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि बच्चों को बाहर खेलने नहीं भेजते। छत पर कपड़े सुखाने में भी डर लगता है। वन विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
- दीपा


कुछ समय पहले हमने अपने खर्चे पर टीम बुलाकर बंदर पकड़वाए थे। अब फिर झुंड के झुंड आ गए हैं। आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा।
- दीनदयाल यादव
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें