भाई सलाम वालेकुम... वालेकुम सलाम दीदी, कैसी हो। यहां सब खैरियत है सिम्मी भाई, आप को खेलते देखना चाहती थी। अहमदाबाद तो नहीं आ सकी, लेकिन गांव आई हूं। अरे वाह... बताओ आपके लिए क्या लेकर आऊं गुजरात से। भाई मुझे क्या चाहिए बस भारतीय टीम के लिए किया गया तुम्हारा प्रदर्शन ही हमारे लिए सबसे बड़ा तोहफा है, ऐसे ही खेलते रहो।
शमी के करीबी राजा, कारी मुनीब ने बताया कि मैच से पिछली रात शमी की मां अंजुम आरा ठीक से सो नहीं सकीं। वह पूरी रात अल्लाह से यही दुआ करती रहीं कि विश्वकप की ट्रॉफी भारतीय टीम के हाथ में हो। शुक्रवार को शमी से फोन पर उनकी बात हुई थी।
शमी के गांव सहसपुर अलीनगर निवासी युवा मोहम्मद जैद, अरबाज, मोहम्मद अनस आदि का कहना है कि हमें क्रिकेट खेलने के लिए जो माहौल मिला वो सिम्मी भाई की देन है। गांव में जो नई पिच बनी है वो युवा खिलाड़ियों ने खुद बनाई है। मैदान की देखरेख सब मिलकर करते हैं।
यदि गांव में स्टेडियम बनेगा तो श्रमदान भी करेंगे। हमें व आने वाली पीढ़ियों को यह तोहफा मिला है कि अब गांव में खेल सुविधाएं बढ़ेंगी। युवाओं का कहना है कि स्टेडियम का नाम सिम्मी भाई के नाम पर ही होना चाहिए।