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Mohammed Shami: यूपी ट्रायल में फेल... बंगाल ने बदली किस्मत, KKR से ब्रेक; इस पाक दिग्गज की सलाह से बने घातक

Wed, 10 Jan 2024 09:59 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा

सार

Mohammed Shami: भारतीय तेज गेंदबाद मोहम्मद शमी यूपी के ट्रायल में सफल नहीं होने पर निराश होकर बंगाल गए थे। बंगाल ने शमी की किस्मत बदल दी। यहां 2009-10 में केकेआर ने 10 लाख रुपये में साइन किया था।
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Mohammed Shami - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यह बात सन 2004 की है। यूपी की ओर से घरेलू क्रिकेट खेलने की चाह में शमी कई बार ट्रायल में फेल हो चुके थे। कोच बदरुद्दीन की सलाह पर उन्होंने बंगाल का रुख किया। यही निर्णय उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ लेकर आया जिसने अमरोहा के ठेट गांव सहसपुर अलीनगर के लड़के सिम्मी को टीम इंडिया का स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी बना दिया।
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बंगाल से पहले शमी ने त्रिपुरा में छह महीने क्रिकेट खेला लेकिन वहां के खेल में उन्हें दम नहीं दिखा। सन 2005 में शमी ने बंगाल में डलहौजी क्रिकेट क्लब ज्वाइन किया। एक साल खेलने के बाद टाउन क्लब ने उन्हें मौका दिया। यह क्लब तत्कालीन बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव देवब्रत दास का था। 

शमी के साथ बंगाल में क्रिकेट खेल चुके मुरादाबाद निवासी मिर्जा दानिश आलम बताते हैं कि दास ने शमी की प्रतिभा को पहचाना। 2007 में शमी ने बंगाल की अंडर-22 टीम के लिए ट्रायल दिया था। उस साल लीग मैचों में उन्होंने 58 विकेट लिए थे। इसके बाद भी अंडर-22 टीम में चयन नहीं हुआ।
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शमी निराश नहीं हुए और अगले साल फिर ट्रायल दिया। उस साल वह लीग मैचों में 32 विकेट ही ले पाए थे लेकिन चयन हो गया। फिर 2008 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने गेंदबाजी में कई कारनामे किए और चयनकर्ताओं की निगाह में आ गए। इसके बाद उन्हें रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका मिला था।

केकेआर ने दिया कॅरिअर को पहला ब्रेक
बंगाल की ओर से लगातार दो साल रणजी ट्रॉफी में खेलने के बाद शमी को आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने मौका दिया। मिर्जा दानिश बताते हैं कि 2010 में शमी को केकेआर प्रबंधन की ओर से फोन आया। 

 

उन्हें फौरन ईडन गार्डन बुलाया गया और 10 लाख रुपये में साइन कर लिया। शमी दो साल केकेआर से जुड़े रहे और एक ही मैच खेल पाए। इस बीच उन्होंने केकेआर के बल्लेबाजों को काफी नेट प्रैक्टिस कराई थी। इससे उनकी गेंदबाजी में और निखार आई।

पाकिस्तानी गेंदबाज वसीम अकरम की सलाह ने बनाया स्टार
जब शमी केकेआर के साथ जुड़े थे, उस समय दिग्गज पाकिस्तानी गेंदबाज वसीम अकरम केकेआर के मेंटॉर थे। अपनी मेहनत के बल पर शमी उनके काफी करीब आ गए। वह कई बार शमी को अकेले प्रैक्टिस कराते थे और सुझाव देते रहते थे। दो साल तक शमी ने उनसे काफी कुछ सीखा।

बॉल पर ग्रिप बनाना, रनअप कितना लेना है, बॉलिंग एक्शन और रिवर्स स्विंग तक कई चीजों पर शमी ने काम करना शुरू कर दिया। मेहनत का नतीजा मिला और 2013 में भारतीय टीम में उनका पदार्पण हुआ। पाकिस्तान के खिलाफ पहले ही मैच में शमी ने शानदार प्रदर्शन किया।

अमरोहा आते हैं तो गांव के लड़कों के साथ करते हैं अभ्यास
शमी जब भी अमरोहा आते हैं तो अपने उन साथियों से जरूर मिलते हैं, जिनके साथ खेत में पिच बनाकर क्रिकेट खेला करते थे। साथ ही आसपास के लड़कों को बुलाकर उनके साथ अपने फार्म हाउस में अभ्यास करते हैं। गांव के युवा भी उनकी गेंदों का सामना कर खुद का प्रदर्शन बेहतर करते हैं।

शमी के बड़े भाई हसीब ने फोन पर बताया कि गांव की पिच ने ही उन्हें यहां तक पहुंचाया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार लेते हुए शमी के हिंदी में बात करने को भी लोग पसंद करते हैं।

14 साल की उम्र में पहली बार पकड़ी थी गेंद
शमी के मुताबिक वह जब 14 साल के थे, तब उन्होंने पहली बार लेदर की गेंद से क्रिकेट खेला। उनके बड़े भाई हसीब शमी को स्कूल से बुलाकर ले गए थे, क्योंकि मैच तय था और खिलाड़ी कम थे। हसीब ने उन्हें विश्वास के साथ मैदान में उतारा और कहा कि ये अच्छी गेंद फेंकता है। टॉस जीते तो शमी को पहले नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया।
 

लेदर की गेंद पिच पर पड़ने के बाद बहुत तेजी से निकल रही थी। बकौल शमी 34-35 गेंदों पर ही उन्होंने 100 रन बना दिए और 10वें ओवर में आउट हो गए। इसके बाद गेंदबाजी में भी दो विकेट चटकाए। वहां से बड़े भाई ने तय कर लिया कि सिम्मी (शमी) को क्रिकेटर ही बनाना है। धीरे-धीरे आसपास के गांवों में शमी के नाम की चर्चा होने लगी। अपने से उम्र में काफी बड़े खिलाड़ियों को शमी अपनी गेंदों से चौंका देते थे।
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16 साल की उम्र में पिता ने उन्हें कोच बदरुद्दीन के पास भेज दिया। दो साल अभ्यास के दौरान शमी ने अंडर-19 टीम के ट्रायल दिए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद कोच बदरुद्दीन ने उन्हें बंगाल भेज दिया। गांव की जिस पिच पर शमी खेलते थे बेशक आज वह वीरान पड़ी है लेकिन गांव के युवाओं को प्रेरणा से भर देती है। 90 के दशक में शमी के पिता तौसीफ अहमद ने गांव सहसपुर अलीनगर में क्रिकेट का ट्रेंड शुरू किया था। एक इंटरव्यू में शमी ने बताया कि उनके पिता अपने कुछ साथियों के संग गांव में आम के बगीचे के पास वाले मैदान में क्रिकेट खेलते थे।
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