स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कोरोना से लड़ाई के लिए मंगलवार को मॉक ड्रिल कर व्यवस्थाएं परखने के आदेश थे। जिले के एल-2 कोविड अस्पताल में न डमी मरीज देखा गया, न दवाएं और न नर्सिंग स्टाफ मौके पर मौजूद था। सिर्फ ऑक्सीजन प्लांट चालू कर बेडों पर सप्लाई चेक करके ही मॉक ड्रिल की इतिश्री की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि डमी देखने के निर्देश नहीं थे। सिर्फ ऑक्सीजन सप्लाई, दवाओं की उपलब्धता और मैन पावर चेक करनी थी। इन तीन बिंदुओं में भी एल-2 अस्पताल में सिर्फ एक ही चेक किया गया। जबकि ठाकुरद्वारा (शरीफनगर), कुंदरकी, डिलारी और मूंढापांडे सीएचसी पर में डमी मरीज के साथ मॉक ड्रिल हुई। एंबुलेंस मरीज को लेकर पहुंची। स्टाफ ने उसे उतारकर वार्ड में शिफ्ट किया।
चिकित्सकों ने ऑक्सीजन मास्क डमी मरीज के मुंह पर लगाकर पाइपलाइन का प्रेशर देखा। नर्सिंग स्टाफ से दवाएं मंगाईं गईं। इसके बाद ड्यूटी रोस्टर चेक किया गया। जबकि 80 बेड वाले एल-2 अस्पताल में मॉक ड्रिल के समय स्टाफ के नाम पर सिर्फ दो लोग मौजूद थे। अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का विद्युत पैनल खराब होने के कारण सोमवार तक यह बंद था। मंगलवार को ही चालू कराया गया। मॉक ड्रिल के दौरान एल-2 अस्पताल के इंचार्ज डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल, चेस्ट फिजिशियन डॉ. प्रवीण शाह आदि मौजूद रहे।